गोवा मिट्टी की मूर्ति सब्सिडी योजना के तहत मिट्टी की मूर्ति बनाने वाले कारीगरों को ₹100 प्रति मूर्ति और सालाना ₹15 हजार तक सब्सिडी मिलती है। जानें पात्रता व आवेदन।
गोवा सरकार पारंपरिक मिट्टी की मूर्ति बनाने वाले स्थानीय कारीगरों को आर्थिक सहायता देने के लिए सब्सिडी योजना संचालित करती है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की पारंपरिक मूर्तिकला और कुटीर उद्योग को संरक्षण देना तथा स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करना है।
मिट्टी से बनी पारंपरिक मूर्तियों को प्लास्टर ऑफ पेरिस और पॉलीफाइबर जैसी वैकल्पिक सामग्रियों से मिल रही प्रतिस्पर्धा के बीच इस योजना के जरिए कारीगरों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत पात्र कारीगर को प्रति पात्र मिट्टी की मूर्ति ₹100 की सब्सिडी मिल सकती है। वहीं, एक कारीगर को एक वर्ष में अधिकतम ₹15,000 तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
इस योजना का संचालन गोवा हस्तशिल्प, ग्रामीण एवं लघु उद्योग विकास निगम लिमिटेड (GHARSSIDC) के माध्यम से किया जाता है। इच्छुक कारीगर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
मिट्टी की मूर्ति पर कितना मिलेगा अनुदान?
योजना के तहत पात्र पंजीकृत कारीगरों द्वारा तैयार की गई मिट्टी की मूर्तियों पर वित्तीय सहायता दी जाती है।
मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- पात्र मूर्ति पर ₹100 तक की सब्सिडी।
- एक कारीगर को सालाना अधिकतम ₹15,000 तक का अनुदान।
- मूर्ति का न्यूनतम आकार 1 फुट होना चाहिए।
- सब्सिडी के लिए मूर्ति का निर्माण और बिक्री गोवा में होना आवश्यक है।
- बिना बिकी हुई मूर्तियों पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- सजावटी वस्तुओं के रूप में इस्तेमाल होने वाली मूर्तियां इस सहायता के दायरे में नहीं आती हैं।
किन मूर्तियों पर मिल सकता है लाभ?
यह योजना मुख्य रूप से धार्मिक उपयोग के लिए बनाई जाने वाली मिट्टी की मूर्तियों को ध्यान में रखकर लागू की गई है। इसमें गणेश, दुर्गा, सरस्वती और मदर मैरी जैसी मूर्तियां शामिल हो सकती हैं।
कारीगर द्वारा मूर्ति का निर्माण स्वयं गोवा में स्थित कार्यशाला या उत्पादन केंद्र में किया जाना जरूरी है। केवल मूर्तियों की खरीद-बिक्री या बाहर से लाई गई मूर्तियां इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। मुख्य शर्तें निम्न हैं:
- आवेदक गोवा का पारंपरिक मिट्टी की मूर्ति निर्माता या कारीगर होना चाहिए।
- कारीगर का GHARSSIDC में पंजीकरण होना जरूरी है।
- मूर्तियों का निर्माण स्वयं गोवा में किया जाना चाहिए।
- आवेदक के पास गोवा में मूर्ति निर्माण के लिए कार्यशाला या उत्पादन इकाई होनी चाहिए।
- मूर्तियां धार्मिक उद्देश्य के लिए बनाई और बेची गई हों।
- कारीगर को तैयार और बेची गई मूर्तियों का रिकॉर्ड रखना होगा।
- बिक्री रिकॉर्ड में मूर्ति का आकार, कीमत, खरीदार का विवरण और बिक्री की तारीख जैसी जानकारी रखनी होगी।
- विभागीय अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले भौतिक निरीक्षण में सहयोग करना होगा।
इन मूर्तियों पर नहीं मिलेगा अनुदान
योजना के तहत कुछ प्रकार की मूर्तियों को सब्सिडी के दायरे से बाहर रखा गया है। बिना बिकी हुई मूर्तियों के लिए अनुदान का दावा नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, केवल सजावट के उद्देश्य से तैयार की गई मूर्तियां भी इस योजना के तहत पात्र नहीं हैं। सब्सिडी का लाभ निर्धारित धार्मिक उपयोग वाली पात्र मिट्टी की मूर्तियों के लिए ही दिया जाता है।
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आवेदन कैसे करें?
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन है। इच्छुक कारीगर निर्धारित आवेदन फॉर्म भरकर संबंधित कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
आवेदन करने के चरण
चरण 1: सबसे पहले योजना का निर्धारित आवेदन फॉर्म प्राप्त करें। फॉर्म का प्रिंटआउट लिया जा सकता है या संबंधित कार्यालय से निर्धारित शुल्क देकर फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है।
चरण 2: आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करें।
चरण 3: भरे हुए और हस्ताक्षरित आवेदन फॉर्म को आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रबंध निदेशक, GHARSSIDC लिमिटेड, पणजी, गोवा के कार्यालय में जमा करें।
आवेदन जमा करने से पहले फॉर्म में दर्ज जानकारी और दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लेना चाहिए।
आवेदन के बाद क्या होगा?
आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी कारीगर की कार्यशाला का निरीक्षण कर सकते हैं। इस दौरान उत्पादन क्षमता की जांच और तैयार मिट्टी की मूर्तियों की भौतिक गणना की जा सकती है।
इसके बाद निर्धारित मूल्यांकन समिति द्वारा आवेदनों की समीक्षा की जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार समिति में अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, नामित निदेशक और सरकारी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। आवेदनों पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर विचार किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
सब्सिडी का भुगतान कैसे होगा?
आवेदन स्वीकृत होने के बाद सरकार से राशि प्राप्त होने पर पात्र पंजीकृत कारीगर के पक्ष में चेक के माध्यम से सब्सिडी का भुगतान किया जाता है।
कारीगरों को मूर्तियों की बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। इसके अलावा, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयोग प्रमाण पत्र जमा करना पड़ सकता है, जिसके बाद शेष सब्सिडी जारी की जा सकती है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय कारीगरों को कई जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- GHARSSIDC में पंजीकरण का प्रमाण
- मूर्तियों की बिक्री से संबंधित प्रमाण
- खरीदार की रसीद या चालान
- बेची गई मूर्तियों के मूल बिल
- GHARSSIDC द्वारा उपलब्ध कराया गया खरीद रजिस्टर
- यह पुष्टि करने वाला दस्तावेज कि मूर्तियां आवेदक ने स्वयं बनाई और बेची हैं
- आवेदक का पता प्रमाण
- कार्यशाला और आवेदक की तस्वीरें
निरीक्षण के समय जरूरी रिकॉर्ड
क्षेत्रीय सत्यापन के दौरान कारीगर को निम्न रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं:
- उत्पादित और बेची गई मूर्तियों का रिकॉर्ड
- बिल बुक
- लगातार क्रमांक वाले तीन बिल
- अधिकारियों द्वारा कार्यशाला का निरीक्षण और मूर्तियों की भौतिक जांच
अनुदान जारी होने के समय
सब्सिडी वितरण के लिए उपयोग प्रमाण पत्र और बैंक खाते से संबंधित आवश्यक जानकारी मांगी जा सकती है। कारीगरों को योजना के मौजूदा नियमों के अनुसार दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
योजना का उद्देश्य क्या है?
गोवा की यह योजना पारंपरिक मिट्टी की मूर्ति निर्माण कला को आर्थिक सहायता देने और स्थानीय कारीगरों को इस व्यवसाय से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। प्रति मूर्ति सहायता और वार्षिक अधिकतम अनुदान के माध्यम से पात्र कारीगरों को उनकी बिक्री पर वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।

