विदेशी मरीजों को आकर्षित करने के लिए भारत ने रणनीति बदली, अब सस्ते इलाज नहीं बल्कि हाई-टेक मेडिकल सुविधाओं पर रहेगा फोकस।
दुनियाभर में बदलते हालात और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का हेल्थकेयर सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक ‘सस्ते इलाज’ के लिए पहचान रखने वाला भारत अब अपनी रणनीति बदलते हुए खुद को एक प्रीमियम और हाई-टेक मेडिकल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। विदेशी मरीजों की संख्या में हालिया गिरावट ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है।
भारत में मेडिकल टूरिज्म हमेशा से एक मजबूत सेक्टर रहा है। महामारी से पहले 2019 में करीब 6.9 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए थे, जिससे देश को भारी विदेशी मुद्रा और रोजगार के अवसर मिले। हालांकि हाल के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 4.5 लाख रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है, जो वैश्विक तनाव, वीजा समस्याओं और यात्रा प्रतिबंधों के कारण आई है।
भारत के अस्पतालों में सबसे ज्यादा मरीज पड़ोसी देश बांग्लादेश से आते रहे हैं, लेकिन वहां हुए राजनीतिक बदलावों और वीजा में देरी के चलते मरीजों की संख्या पर असर पड़ा है। इसके बावजूद हेल्थकेयर इंडस्ट्री को भरोसा है कि हालात सामान्य होने के साथ ही यह संख्या फिर से तेजी से बढ़ेगी।
अब सबसे बड़ा बदलाव भारत की रणनीति में देखने को मिल रहा है। पहले जहां देश खुद को ‘कम खर्च में बेहतर इलाज’ के रूप में प्रस्तुत करता था, वहीं अब फोकस अत्याधुनिक तकनीक, तेजी से इलाज और विश्वस्तरीय सुविधाओं पर है। भारत के बड़े अस्पताल अब रोबोटिक सर्जरी, एआई आधारित डायग्नोसिस, एडवांस कैंसर ट्रीटमेंट और हाई-एंड कार्डियक केयर जैसी सेवाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
एशिया के अन्य देशों जैसे Thailand, Singapore और Malaysia से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा ने भारत को यह रणनीतिक बदलाव करने के लिए प्रेरित किया है। ये देश पहले ही प्रीमियम मेडिकल सुविधाओं के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में भारत भी अब उसी स्तर पर खुद को स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।
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देश के प्रमुख अस्पताल समूह भी इस बदलाव को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। Apollo Hospitals की प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर केवल अस्थायी है और आने वाले समय में श्रीलंका, इंडोनेशिया और CIS देशों से मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। वहीं Max Healthcare के चेयरमैन अभय सोई का कहना है कि यदि वीजा प्रक्रिया को और आसान बना दिया जाए, तो भारत मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में फिर से नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास अनुभवी डॉक्टर, अत्याधुनिक अस्पताल और अपेक्षाकृत किफायती लागत का एक अनूठा संयोजन है, जिसे अगर सही रणनीति के साथ पेश किया जाए तो यह देश को वैश्विक हेल्थकेयर हब बना सकता है। खासकर कैंसर, हार्ट और न्यूरो जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में भारत पहले से ही मजबूत स्थिति में है।
कुल मिलाकर, भारत अब मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘सस्ते इलाज’ की छवि से बाहर निकलकर हाई-टेक और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस करने की यह रणनीति आने वाले वर्षों में भारत को दुनिया के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशनों में शामिल कर सकती है।

