Bhooth Bangla फिल्म रिव्यू: अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी में शानदार कॉमेडी लेकिन कमजोर सेकेंड हाफ, जानिए फिल्म देखने लायक है या नहीं।
बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी का ट्रेंड एक बार फिर लौट आया है, जहां Bhooth Bangla के जरिए अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी ने करीब 14 साल बाद वापसी की है। ‘भूल भुलैया’, ‘हेरा फेरी’ और ‘गरम मसाला’ जैसी कल्ट फिल्मों के बाद इस जोड़ी से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या ‘भूत बंगला’ उस उम्मीद पर खरी उतरती है या नहीं?
फिल्म की कहानी मंगलपुर नाम के एक गांव से शुरू होती है, जहां ‘वधूसुर’ नाम का एक राक्षस शादी के बाद दुल्हनों को उठा ले जाता है। इसी वजह से गांव में शादी करना मना है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब लंदन में रहने वाला अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) अपने पुश्तैनी बंगले के लालच में मंगलपुर पहुंचता है और अपनी बहन की शादी उसी कथित भूतिया हवेली में कराने का फैसला करता है। गांव वालों के डर और चेतावनियों के बावजूद वह इस फैसले पर अड़ा रहता है, जिसके बाद कहानी में हॉरर और सस्पेंस का तड़का लगना शुरू होता है।
फिल्म का पहला हाफ पूरी तरह कॉमेडी से भरपूर है, जहां परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी जैसे कलाकार दर्शकों को खूब हंसाते हैं। कई सीन ऐसे हैं जो क्लासिक कॉमेडी फिल्मों की याद दिलाते हैं और अक्षय कुमार की टाइमिंग एक बार फिर दर्शकों को पुराने दौर की याद दिलाती है।
हालांकि, इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और कहानी ज्यादा हॉरर की ओर झुक जाती है। दूसरे हाफ में कॉमेडी की कमी महसूस होती है और कुछ किरदारों का स्क्रीन टाइम भी कम हो जाता है, जिससे फिल्म का बैलेंस बिगड़ता नजर आता है। क्लाइमेक्स भी उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता और कहानी कुछ सवाल अधूरे छोड़ जाती है।
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तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और विजुअल इफेक्ट्स अच्छे हैं, जो 60-70 के दशक के हॉरर माहौल को सही तरीके से पेश करते हैं। हालांकि बैकग्राउंड म्यूजिक और गाने उतना असर नहीं छोड़ते, जितनी उम्मीद की जा रही थी।
एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार ने डबल रोल में शानदार प्रदर्शन किया है और उनका कॉमिक अंदाज दर्शकों को पसंद आएगा। असरानी और परेश रावल ने अपने किरदारों में जान डाल दी है, वहीं राजपाल यादव का छोटा लेकिन असरदार रोल भी फिल्म में हंसी का तड़का लगाता है। तब्बू की स्क्रीन प्रेजेंस भी दमदार है, हालांकि वामिका गब्बी का किरदार उतना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाता।
कुल मिलाकर, ‘भूत बंगला’ एक एंटरटेनिंग फिल्म है जो अपने पहले हाफ में आपको खूब हंसाती है, लेकिन दूसरे हाफ में थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। अगर आप हल्की-फुल्की हॉरर कॉमेडी और अक्षय कुमार की क्लासिक कॉमिक टाइमिंग देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।

