मिट्टी की जांच से जानें खेत की उर्वरता, खाद की सही मात्रा और मिट्टी का नमूना लेने का तरीका। बेहतर पैदावार और खेती की लागत घटाने के आसान उपाय।
खेती में अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए सिर्फ अच्छे बीज और खाद का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। फसल की जरूरत के अनुसार मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता जानना भी जरूरी है। मिट्टी की जांच से किसानों को पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की स्थिति कैसी है। इससे उर्वरकों का सही इस्तेमाल करने, खेती की लागत घटाने और फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बिना मिट्टी की जांच कराए जरूरत से ज्यादा खाद डालने पर किसानों का खर्च बढ़ सकता है। वहीं, पोषक तत्वों की कमी होने पर फसल की बढ़वार और पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसलिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी का परीक्षण कराना बेहतर कृषि प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मिट्टी की जांच कराने से किसानों को क्या फायदे मिलते हैं?
मिट्टी परीक्षण के जरिए खेत की उर्वरता और पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जाता है। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- मिट्टी की उर्वरता की जानकारी: खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों और मिट्टी की स्थिति का पता चलता है।
- खाद की सही मात्रा तय करने में मदद: परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों की सिफारिश की जा सकती है।
- खेती की लागत में बचत: जिन पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा मिट्टी में मौजूद है, उनके अनावश्यक इस्तेमाल से बचा जा सकता है।
- उत्पादन बढ़ाने में सहायता: संतुलित पोषण मिलने से फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर उपज की संभावना बढ़ती है।
- मिट्टी सुधारने में मदद: मिट्टी के पीएच और अन्य परीक्षण परिणामों के आधार पर जरूरत पड़ने पर उपयुक्त सुधारक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
- उर्वरकों का बेहतर उपयोग: सही मात्रा और उचित समय पर खाद देने से पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ सकती है।
खेत की मिट्टी की जांच कब करानी चाहिए?
मिट्टी का नमूना लेने का समय फसल चक्र, खेती की सघनता और खेत की स्थिति पर निर्भर करता है। सघन खेती करने वाले किसानों के लिए नियमित परीक्षण विशेष रूप से उपयोगी है। सामान्य परिस्थितियों में कृषि विभाग या मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की सलाह के अनुसार लगभग दो से तीन साल के अंतराल पर जांच कराई जा सकती है। यदि खेत में उत्पादन घट रहा हो, मिट्टी में असामान्य बदलाव दिखें या खेती की पद्धति में बड़ा परिवर्तन किया गया हो, तो अतिरिक्त जांच की जरूरत भी पड़ सकती है।
बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराने से रिपोर्ट के अनुसार खाद और उर्वरकों की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
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मिट्टी का नमूना लेने का सही तरीका क्या है?
मिट्टी की जांच की रिपोर्ट तभी उपयोगी होती है, जब खेत से लिया गया नमूना सही तरीके से तैयार किया गया हो। एक समान मिट्टी वाले लगभग एक हेक्टेयर खेत से नमूना लेने के लिए नीचे दिए गए तरीके अपनाए जा सकते हैं।
1. खेत में 15 से 16 स्थान चुनें
सबसे पहले खेत में अलग-अलग स्थानों को चुनें, ताकि नमूने में पूरे क्षेत्र की मिट्टी का प्रतिनिधित्व हो सके। एक समान मिट्टी वाले खेत में सामान्यतः 15 से 16 स्थानों से मिट्टी लेना उपयोगी रहता है।
यदि खेत के किसी हिस्से की मिट्टी, फसल की स्थिति या जल निकासी बाकी क्षेत्र से अलग है, तो उस हिस्से का नमूना अलग से लें।
2. मिट्टी की ऊपरी परत से नमूना लें
चुने गए स्थानों पर खरपतवार और सतह पर मौजूद कचरा हटाएं। इसके बाद खुरपी से अंग्रेजी के ‘V’ आकार का लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर गहरा गड्ढा बनाएं। सामान्य फसल भूमि में परीक्षण के लिए निर्धारित गहराई, अक्सर 0 से 15 या 0 से 20 सेंटीमीटर, के अनुसार मिट्टी लें। सही गहराई के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
गड्ढे की एक ओर से ऊपर से नीचे तक समान मोटाई की मिट्टी निकालकर नमूना एकत्र करें। मिट्टी का नमूना लेने के लिए उपयुक्त मृदा ऑगर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
3. सभी नमूनों को अच्छी तरह मिलाएं
खेत के अलग-अलग स्थानों से एकत्र की गई मिट्टी को साफ प्लास्टिक की बाल्टी या तसले में डालें। उसमें मौजूद कंकड़, पत्थर, जड़ें और घास-फूस जैसी बाहरी चीजें निकाल दें।
इसके बाद मिट्टी को साफ प्लास्टिक शीट या मोटे कागज पर फैलाकर अच्छी तरह मिलाएं, ताकि सभी स्थानों की मिट्टी एक समान मिश्रण में शामिल हो जाए।
4. लगभग 500 ग्राम मिट्टी का नमूना तैयार करें
मिली हुई मिट्टी को समतल करके चार बराबर हिस्सों में बांट लें। आमने-सामने के दो हिस्सों को हटाएं और बचे हुए हिस्सों को फिर से मिलाकर यही प्रक्रिया दोहराएं।
इस तरीके से लगभग 500 ग्राम मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना तैयार किया जा सकता है। इसे साफ कपड़े या उपयुक्त थैली में भरकर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तक पहुंचाएं। नमूने को पैक करने और सुखाने के संबंध में प्रयोगशाला के निर्देशों का पालन करें।
मिट्टी के नमूने के साथ कौन-सी जानकारी देनी चाहिए?
नमूना जमा करते समय किसान को खेत और फसल से जुड़ी जरूरी जानकारी भी देनी चाहिए। इससे परीक्षण रिपोर्ट को सही संदर्भ में समझने में सहायता मिलती है।
- किसान का नाम और पिता का नाम।
- गांव, विकासखंड, तहसील और जिले का नाम।
- खेत का खसरा नंबर, पहचान और क्षेत्रफल।
- पिछले मौसमों में खेत में उगाई गई फसलों का विवरण।
- अगली बार बोई जाने वाली फसल का नाम।
- सिंचाई के पानी का स्रोत।
- नमूना लेने की गहराई।
- हाल में इस्तेमाल किए गए खाद और उर्वरकों की जानकारी।
मिट्टी का नमूना लेते समय किन गलतियों से बचें?
सही जांच रिपोर्ट पाने के लिए नमूना एकत्र करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
- खाद के ढेर, खाद के गड्ढों और पेड़ों के ठीक नीचे से सामान्य खेत का नमूना न लें।
- खेत के असामान्य या अलग प्रकृति वाले हिस्सों की मिट्टी को सामान्य नमूने में न मिलाएं।
- जहां लंबे समय तक पानी जमा रहता है, वहां की मिट्टी का नमूना अलग से लें।
- मिट्टी का कटाव होने वाले हिस्से को बाकी खेत से अलग रखें।
- बड़े खेत या अलग-अलग मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए जरूरत के अनुसार अलग नमूने तैयार करें।
- मिट्टी को उर्वरकों की बोरियों के पास न रखें और न ही खाद के ऊपर सुखाएं।
- जिन हिस्सों में हाल ही में खाद डाली गई है, उनकी जानकारी दर्ज करें और जरूरत पड़ने पर अलग नमूना लें।
- प्रत्येक नमूने पर खेत की पहचान और किसान का विवरण स्पष्ट रूप से लिखें।
मिट्टी की जांच रिपोर्ट के बाद क्या करें?
मिट्टी परीक्षण के बाद मिली रिपोर्ट के आधार पर फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों की योजना बनानी चाहिए। यदि मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उसकी पूर्ति करें। इसी तरह मिट्टी का पीएच असंतुलित होने पर उपयुक्त सुधारक का चयन परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही करें।
किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग या मृदा परीक्षण प्रयोगशाला से संपर्क करके नमूना लेने और रिपोर्ट समझने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

