प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 जिलों में कृषि विकास पर जोर। जानें शिवराज सिंह चौहान के निर्देश, KCC, दलहन-तिलहन और किसानों की आय बढ़ाने की योजना।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार जिला स्तर पर कृषि विकास की योजनाओं को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि योजनाएं दिल्ली में बैठकर तैयार करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों, किसानों की जरूरतों और जिलों की समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने अधिकारियों से कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की अपील की। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करना और किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।
100 जिलों में कृषि विकास को मिलेगी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का लक्ष्य देश के 100 चयनित जिलों में कृषि विकास को गति देना है। इनमें ऐसे जिले शामिल हैं, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता कमजोर है या किसानों को कृषि ऋण अपेक्षाकृत कम उपलब्ध होता है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में 50 से अधिक जिलों के कलेक्टरों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
योजना के तहत जिला प्रशासन को स्थानीय कृषि परिस्थितियों का आकलन करके ऐसी कार्ययोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे खेती की प्रमुख समस्याओं का समाधान किया जा सके।
हर महीने होगी जिला कृषि योजनाओं की समीक्षा
शिवराज सिंह चौहान ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि कृषि विकास से जुड़े विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। उन्होंने हर महीने जिला कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करने और योजनाओं के वास्तविक परिणामों का आकलन करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि उनका लाभ किसानों तक पहुंचाना भी होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के शोध और आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। इसके लिए कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत बनाने और किसानों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई गई।
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धान की कटाई के बाद खाली खेतों में होगी दलहन-तिलहन की खेती
सम्मेलन में धान की कटाई के बाद खाली रह जाने वाली कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई। ऐसी जमीन पर दलहन और तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने से भूमि की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आमदनी में सुधार करने की संभावनाएं हैं।
फसल चक्र में विविधता लाने से किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त फसलों का चयन कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकता है।
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का दायरा बढ़ाने और उन जिलों में संस्थागत कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर करने पर भी जोर दिया गया, जहां किसानों को कर्ज प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
खेती के साथ पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर फोकस
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केवल फसल उत्पादन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी विकास की रणनीति में शामिल करने पर जोर दिया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। इन गतिविधियों से किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध हो सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
सम्मेलन में जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और बागवानी को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई। विभिन्न जिलों में अपनाए गए नवाचारों और उपयोगी तरीकों को साझा किया गया, ताकि दूसरे जिले भी अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार इनसे सीख सकें।
इन जिलों के कृषि नवाचारों पर हुई चर्चा
राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान गढ़चिरौली, अल्लूरी सीताराम राजू, बांका, किश्तवाड़, कोरबा और फाजिल्का सहित कई जिलों में किए गए कृषि संबंधी प्रयासों के उदाहरण साझा किए गए।
इन उदाहरणों के जरिए यह समझने पर जोर दिया गया कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार की गई योजनाएं कृषि विकास में किस तरह योगदान दे सकती हैं।
जिला प्रशासन को अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान करके व्यावहारिक कार्ययोजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई।
किसानों की आय बढ़ाने में जिला स्तर की योजनाएं होंगी अहम
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य चयनित जिलों में कृषि विकास की गति बढ़ाना और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने से कृषि ऋण, सिंचाई, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और कृषि से जुड़े दूसरे व्यवसायों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।

