प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का एक साल पूरा। दिल्ली में उत्कृष्ट जिलों को सम्मान मिला। जानें 100 जिलों में कृषि विकास और किसानों के प्रशिक्षण की प्रगति।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के एक वर्ष पूरे होने पर 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया। सम्मेलन में कृषि विकास, किसानों की आय बढ़ाने और जिला स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 16 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली के पूसा परिसर से इसकी शुरुआत की थी। योजना का मुख्य उद्देश्य देश के ऐसे 100 जिलों में कृषि विकास को गति देना है, जहां खेती की उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है।
100 जिलों में कृषि विकास के लिए हर साल 24,000 करोड़ रुपये का प्रावधान
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रतिवर्ष 24,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। इस पहल में 11 मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं को राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
इसका उद्देश्य चयनित जिलों में कृषि से संबंधित विभिन्न सुविधाओं और योजनाओं का समन्वित लाभ पहुंचाना है। अलग-अलग योजनाओं को एक साथ लागू करने से किसानों को सिंचाई, कृषि ऋण, फसल विविधीकरण और आधुनिक खेती से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
योजना के तहत प्रत्येक राज्य से कम से कम एक जिले को शामिल किया गया है। स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर कृषि विकास की कार्ययोजनाएं तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
योजना के तहत जिलों के प्रदर्शन में हुआ सुधार
कृषि मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, योजना में शामिल 100 जिलों का औसत प्रदर्शन स्कोर अप्रैल 2026 में 22.54 अंक था, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 38.85 अंक हो गया।
विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज प्रगति इस प्रकार है:
- कृषि उत्पादकता: स्कोर 2.53 से बढ़कर 6.70 हुआ।
- फसल विविधीकरण: स्कोर 5.60 से बढ़कर 8.65 पहुंचा।
- सिंचाई सुविधाएं: स्कोर 1.65 से बढ़कर 4.20 हुआ।
- कृषि ऋण की उपलब्धता: स्कोर 2.81 से बढ़कर 5.59 पहुंचा।
इन आंकड़ों के आधार पर योजना के अंतर्गत चयनित जिलों में कृषि विकास से जुड़े विभिन्न संकेतकों की प्रगति का आकलन किया जा रहा है।
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लाखों किसानों को दिया गया कृषि कौशल का प्रशिक्षण
योजना के तहत किसानों और कृषि विस्तार से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6.90 लाख से अधिक किसानों और लगभग 89 हजार कृषि विस्तार कर्मियों को अलग-अलग कौशल का प्रशिक्षण दिया गया।
इसी अवधि में 2.25 लाख से अधिक लोगों को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण भी मिला। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, टिकाऊ खेती और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी तकनीकों से परिचित कराना है।
कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को भी इस पहल में तकनीकी सहयोगी के रूप में शामिल किया गया है। ये केंद्र जिले की कृषि परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों के आधार पर तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले को मिला सम्मान
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दस जिलों में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले को भी स्थान मिला। जिले के कलेक्टर विनय गौड़ा जीसी को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी दीपक गवली के अनुसार, जिलों का चयन योजना के डैशबोर्ड पर हर महीने दर्ज होने वाली प्रगति के आधार पर किया गया।
सम्मान मिलने पर कलेक्टर विनय गौड़ा जीसी ने इसका श्रेय कृषि विभाग और योजना से जुड़े कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा कि जिले में कृषि विकास और किसान कल्याण से संबंधित नवाचारों को आगे भी बढ़ावा दिया जाएगा।
महाराष्ट्र के पालघर, यवतमाल, गढ़चिरौली, धुले, रायगढ़, चंद्रपुर, नांदेड़ और बीड़ जिलों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। प्रत्येक जिले से कलेक्टर, नोडल अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और एक प्रगतिशील किसान को आमंत्रित किया गया था।
जिला स्तर पर बनेगी कृषि विकास की कार्ययोजना
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विकास को आगे बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर कार्यदल बनाए गए हैं। इनमें ग्राम पंचायत या जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों को शामिल किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कृषि से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना और योजनाओं का लाभ किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
योजना की प्रगति पर नजर रखने के लिए नीति आयोग ने एक अलग डैशबोर्ड भी विकसित किया है। इसकी वित्तीय प्रगति से संबंधित सुविधा अगस्त 2026 के अंत में शुरू की गई थी। इससे योजनाओं पर होने वाले खर्च और उनके क्रियान्वयन की स्थिति की निगरानी करने में सहायता मिल सकती है।
खेती के साथ पशुपालन, बागवानी और मत्स्य पालन पर भी ध्यान
योजना का दायरा केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है। किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के लिए इसमें फल उत्पादन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन और कृषि-वानिकी जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
इसका उद्देश्य किसानों को कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अलग-अलग जिलों में उपलब्ध संसाधनों, जलवायु और स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुसार इन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्रों की भागीदारी से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र के अनुकूल खेती और सहायक व्यवसायों का चयन कर सकें।
किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए होगी निगरानी
योजना के अगले चरण में लाभार्थी स्तर पर प्रगति दर्ज करने वाला मॉड्यूल शुरू करने की तैयारी है। इसके माध्यम से यह आकलन करने में मदद मिल सकती है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक किस हद तक पहुंच रहा है।
इसके साथ ही जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, विभागीय समन्वय और वित्तीय प्रगति की निगरानी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

