पापांकुशा एकादशी 2026: 22 अक्टूबर को तुलसी में जल चढ़ाएं या नहीं? जानें तुलसी पूजा, पत्ते तोड़ने और व्रत पारण के जरूरी नियम।
पापांकुशा एकादशी 2026: हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाला माना जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान है। हालांकि, एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की परंपरा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस दिन तुलसी के पौधे में पानी डालना चाहिए और क्या तुलसी के पत्ते तोड़े जा सकते हैं?
पापांकुशा एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व
सनातन परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। इसी कारण विष्णु पूजा और भोग में तुलसी दल का इस्तेमाल करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर तुलसी के पौधे की पूजा करने, उसके पास दीपक जलाने और परिक्रमा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करने की भी परंपरा है।
क्या एकादशी पर तुलसी में जल चढ़ाना चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं, इसलिए उन्हें जल न देने की परंपरा है।
हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता है। इसका वैज्ञानिक आधार नहीं माना जाता। जो लोग इस परंपरा का पालन करते हैं, वे एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं डालते और सामान्य पूजा करते हैं।
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एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ना भी माना जाता है वर्जित
पापांकुशा एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की भी धार्मिक परंपरा में मनाही बताई गई है। यदि भगवान विष्णु को भोग या पूजा में तुलसी दल चढ़ाना हो तो इसे एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को तोड़कर रखा जा सकता है।
इससे एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
शाम को तुलसी के पास जलाएं दीपक
एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है और तुलसी की परिक्रमा की जाती है। कई परिवारों में इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने की भी परंपरा है।
पापांकुशा एकादशी 2026 की तारीख और पारण समय
पंचांग के अनुसार इस वर्ष पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण करते हैं।
- पापांकुशा एकादशी: 22 अक्टूबर 2026
- दिन: गुरुवार
- व्रत पारण: 23 अक्टूबर 2026
- पारण समय: सुबह 06:27 बजे से 08:42 बजे तक
स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के आधार पर पारण के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

