मैसूर शिल्प समागम मेला 2026 में 12 राज्यों के कारीगरों के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगी है। जानें मेले की खासियतें और तारीखें।
कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने और पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कर्नाटक के मैसूर में शिल्प समागम मेला 2026 का आयोजन किया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की इस पहल के तहत 11 अक्टूबर से शुरू हुआ यह नौ दिवसीय मेला 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। मैसूर दशहरा एग्जिबिशन ग्राउंड में आयोजित इस मेले में देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कारीगर अपने पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस मेले का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारी समुदायों से जुड़े कारीगरों को बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना, उनकी आय बढ़ाने के अवसर तैयार करना और पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाना है।
मैसूर शिल्प समागम मेले में लगाए गए 83 स्टॉल
शिल्प समागम मेला 2026 में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए हैं। खास बात यह है कि इनमें 37 महिला कारीगर भी शामिल हैं, जिन्हें अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। मेले में आने वाले लोगों के लिए पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी लगाए गए हैं।
इस आयोजन में ऐसे कारीगर हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) के माध्यम से सहायता मिलती है।
12 राज्यों के पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी
मैसूर के इस शिल्प मेले में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कारीगर भाग ले रहे हैं।
मेले में भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय कलाओं और हस्तशिल्प की विविधता देखने को मिल रही है। यहां आने वाले लोग पारंपरिक उत्पादों को करीब से देख सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी भी कर सकते हैं।
प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:
- पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा साड़ियां
- कांजीवरम साड़ियां और ब्लॉक प्रिंट वाले कपड़े
- लकड़ी के खिलौने और रोजवुड से बने सजावटी सामान
- टेराकोटा उत्पाद और कृत्रिम आभूषण
- चमड़े के सामान, बैग और पर्स
- मसाले, अचार, अगरबत्ती और शहद से बने उत्पाद
- बेड कवर, कुशन कवर और वॉल हैंगिंग
इन उत्पादों के माध्यम से कारीगरों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के साथ नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
कारीगरों को मुफ्त स्टॉल और अन्य सुविधाएं
कारीगरों की भागीदारी को आसान बनाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से कई सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें मुफ्त स्टॉल के साथ यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन का खर्च और दोपहर व रात के भोजन की व्यवस्था शामिल है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कारीगर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के अवसर से वंचित न रहें। इससे उन्हें स्टॉल किराए और आयोजन से जुड़े कुछ प्रमुख खर्चों की चिंता किए बिना अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
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अब तक 975 कारीगरों को मिल चुका है लाभ
मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह पहला शिल्प समागम मेला है, जिसे मैसूर में आयोजित किया जा रहा है। इस पहल के जरिए सरकार का प्रयास पारंपरिक शिल्प से जुड़े लोगों को अधिक अवसर उपलब्ध कराना और उनकी आजीविका को मजबूत करना है।
भारत ट्यूलिप पहल से ऑनलाइन बाजार तक पहुंचेगा सामान
कारीगरों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों का उत्थान आजीविका कार्यक्रम) पहल भी शुरू की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को एक ब्रांड पहचान देना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उनकी बिक्री के अवसर बढ़ाना है।
इस पहल के माध्यम से भारत और विदेशों में ग्राहकों तक कारीगरों के उत्पाद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के साथ कारीगरों के लिए नए व्यावसायिक अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
देश के अन्य शहरों में भी लगेंगे शिल्प समागम मेले
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने गुवाहाटी, दिल्ली हाट (नई दिल्ली), जोधपुर और लखनऊ में भी शिल्प समागम मेले आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
इसके अतिरिक्त मंत्रालय और उससे जुड़े तीन राष्ट्रीय निगम 14 से 27 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 में भाग लेने की योजना बना रहे हैं। फरवरी 2027 में फरीदाबाद में आयोजित होने वाले सूरजकुंड मेले में भी उनकी भागीदारी प्रस्तावित है।
कारीगरों की आय और पारंपरिक कला को मिलेगा बढ़ावा
मैसूर का शिल्प समागम मेला केवल हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह कारीगरों को बाजार से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुफ्त स्टॉल, यात्रा सहायता और डिजिटल बिक्री को प्रोत्साहित करने जैसे प्रयास कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को प्रोत्साहित करना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

