हरियाणा में लोकनाट्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए कुरुक्षेत्र में 23 से 27 फरवरी 2026 तक सांग महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें 24 सांगों की प्रस्तुतियां होंगी।
हरियाणा की समृद्ध लोकनाट्य परंपरा को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से 23 से 27 फरवरी 2026 तक कुरुक्षेत्र में पांच दिवसीय सांग महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन सूचना, लोक संपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा द्वारा ‘श्री धनपत सिंह सांगी स्मृति पुरस्कार’ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से हरियाणा की लोकसंस्कृति को जीवंत करेंगे।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह महोत्सव प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से कलाकृति भवन, हरियाणा कला परिषद, ब्रह्मसरोवर के निकट, कुरुक्षेत्र में आयोजित होगा। सांग महोत्सव को हरियाणा का एक प्रमुख पारंपरिक लोकनाट्य उत्सव माना जाता है, जिसमें ऐतिहासिक, पौराणिक और लोककथाओं पर आधारित कथानकों का मंचन किया जाता है। इस पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन में कुल 24 सांग प्रस्तुत किए जाएंगे।
प्रवक्ता के अनुसार, 23 फरवरी को ‘वीर विक्रमजीत’, ‘हीर-रांझा’, ‘राजा नल दमयंती’ और ‘पिंगला भरथरी’ जैसे लोकप्रिय सांग मंचित होंगे। 24 फरवरी को ‘हीरामल्ल जमाल’, ‘जानी चोर’, ‘बणदेवी’, ‘गोपी चंद’ और ‘चंद्र प्रभा मदनपाल’ की प्रस्तुतियां होंगी। 25 फरवरी को दर्शक ‘लीलो चमन’, ‘बणदेवी’, ‘पिंगला भरथरी’, ‘शाही लकड़हारा’ और ‘दुष्यंत शकुंतला’ जैसे सांग देख सकेंगे।
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26 फरवरी को ‘बणदेवी’, ‘राजा नल दमयंती’, ‘हीरामल्ल जमाल’, ‘गोपी चंद’ और ‘सेठ ताराचंद’ का मंचन किया जाएगा। वहीं समापन दिवस 27 फरवरी को ‘धर्म की जीत’, ‘बणदेवी’, ‘राजा उत्तानपाद ध्रुव का जन्म’ और ‘विराट पर्व’ जैसे सांगों के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा।
आयोजकों के अनुसार, सांग महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हरियाणा की लोकनाट्य परंपरा को संरक्षित करना, कलाकारों को मंच प्रदान करना और आमजन को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। इस महोत्सव के माध्यम से प्रदेश की लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

