हरियाणा के मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने जींद में 108 कुंडीय महायज्ञ में कहा कि सनातन परंपराएं भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और ऐसे आयोजन समाज व राष्ट्र को जोड़ते हैं।
हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जींद में आयोजित 108 कुंडीय महायज्ञ जैसे भव्य कार्यक्रम पर्यावरण शुद्धि के साथ-साथ आमजन में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी रविवार देर सायं जींद में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में जगतगुरु पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहे 103वें महायज्ञ की महा आरती में शामिल हुए और श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि सदियों से संतों, ऋषि-मुनियों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है, जहां से पूरी दुनिया को आध्यात्म, नैतिकता और मानवता के उच्च आदर्शों की प्रेरणा मिली है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार अध्यात्म, नैतिकता और मानव मूल्यों पर टिका हुआ है। हमारे संत-महापुरुषों ने अपने उपदेश, तप और त्याग के माध्यम से समाज को सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में ज्ञान और साधना की समृद्ध परंपरा रही है, जिसे वेद, उपनिषद, पुराण और महाकाव्य जैसे ग्रंथों ने और अधिक सशक्त बनाया है।
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उन्होंने बताया कि रामायण हमें मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश देती है, जबकि महाभारत धर्म और अधर्म के संघर्ष के माध्यम से सत्य की विजय का मार्ग दिखाती है। वहीं भगवद्गीता जीवन के हर संकट में कर्तव्य पालन, कर्मयोग और आत्मबल की प्रेरणा देती है। मंत्री ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
श्री बेदी ने कहा कि 108 कुंडीय महायज्ञ जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक समरसता, पर्यावरण शुद्धि और राष्ट्रहित की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें और सनातन परंपराओं से जुड़कर समाज को एकजुट और सशक्त बनाने में योगदान दें।

