इंदौर में 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोया उद्योग, किसानों की आय, खाद्य तेल आत्मनिर्भरता और कृषि प्रसंस्करण में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विस्तार देने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने तथा खाद्य तेल के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण बताया।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में देश-विदेश के उद्योग प्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, उद्यमियों और प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में सोयाबीन उत्पादन को बेहतर बनाने, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारतीय सोया उद्योग की स्थिति मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सोया उद्योग के विकास से किसानों को मिल सकता है बेहतर मूल्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सोयाबीन उत्पादन और कृषि आधारित उद्योगों के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रदेश का मालवा क्षेत्र सोयाबीन की खेती के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार के विस्तार के जरिए इस क्षेत्र की संभावनाओं का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलने से किसानों की उपज का मूल्य बढ़ाने, भंडारण सुविधाओं में सुधार करने और विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कृषि आधारित उद्योगों के विकास को राज्य की आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।
निवेश और रोजगार बढ़ाने पर सरकार का फोकस
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।
प्रदेश में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की औद्योगिक संभावनाओं को सामने लाने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसरों का विस्तार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों की आय में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री के अनुसार, खाद्य तेल उद्योग देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और सोया उद्योग से जुड़े कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें SOPA के पूर्व अध्यक्ष डेविश जैन, उपाध्यक्ष गिरीश मतलानी, कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक, उच्चस्तरीय समिति के सदस्य कृष्ण वीर चौधरी और भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के प्रोफेसर एवं कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजय पाल शर्मा शामिल थे।
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‘आत्मनिर्भर भारत’ और खाद्य तेल उत्पादन पर चर्चा
9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव की थीम ‘आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन’ रखी गई। इसके तहत सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने, प्रसंस्करण तकनीकों को आधुनिक बनाने तथा भारतीय उत्पादों के लिए बाजार के अवसर विकसित करने पर विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सोया क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। सोयाबीन की उत्पादकता में सुधार, प्रसंस्करण इकाइयों की क्षमता बढ़ाने और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने जैसे विषय प्रमुख रहे।
सोयाबीन से खाद्य तेल के साथ प्रोटीन आधारित उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इसलिए इस क्षेत्र का विकास कृषि आय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और पोषण की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
घरेलू उत्पादन और प्रसंस्करण को मजबूत करने से किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके लिए उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और आयात नीति के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
SOPA ने जीएम सोयाबीन के आयात पर रोक जारी रखने की मांग की
कॉन्क्लेव के दौरान सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के अध्यक्ष नरेश गोयनका, उपाध्यक्ष गिरीश मतलानी और कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक ने सोयाबीन उद्योग से जुड़ी नीतिगत मांगें सामने रखीं।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने जीएम सोयाबीन के आयात पर रोक जारी रखने और सोयाबीन बीज के आयात की अनुमति नहीं देने की मांग की। उनका कहना था कि कम कीमत वाले विदेशी सोयाबीन से भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है। साथ ही, खाद्य तेल और प्रोटीन की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ने की आशंका भी जताई गई।
SOPA ने घरेलू सोयाबीन उत्पादन को प्रोत्साहित करने, आयात शुल्क की नीति को स्थिर रखने और मंडी टैक्स समाप्त करने की मांग भी उठाई। एसोसिएशन का मानना है कि नीतिगत स्थिरता और घरेलू उत्पादकों को बेहतर अवसर मिलने से भारतीय सोया उद्योग को मजबूती मिल सकती है।
ये मांगें उद्योग संगठन की ओर से रखी गई हैं। इन पर सरकार की ओर से किसी नए फैसले की घोषणा की जानकारी इस कार्यक्रम के विवरण में नहीं दी गई है।
किसानों और उद्योगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सोया क्षेत्र?
सोयाबीन की खेती मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे किसानों को आय प्राप्त होती है और प्रसंस्करण उद्योगों को कच्चा माल मिलता है। सोया आधारित उद्योगों के विस्तार से तेल उत्पादन, खाद्य उत्पाद निर्माण, भंडारण, परिवहन और विपणन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोया क्षेत्र की दीर्घकालिक मजबूती के लिए बेहतर बीज, उन्नत कृषि तकनीक, प्रसंस्करण सुविधाएं, प्रभावी विपणन व्यवस्था और स्थिर नीतिगत वातावरण महत्वपूर्ण हैं।
इंदौर में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य तेल उत्पादन को प्रोत्साहित करने और उद्योगों में निवेश के अवसर विकसित करने पर दिया गया जोर इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन प्रयासों का वास्तविक लाभ किसानों तक कितना पहुंचेगा, यह नीतिगत फैसलों, बाजार की परिस्थितियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

