भारत में सेमीकंडक्टर क्रांति तेज हो रही है। जानें PM मोदी का ग्लोबल कंपनियों को संदेश, Semicon 2.0, निवेश, उत्पादन और 2030 के बाजार लक्ष्य की पूरी जानकारी।
भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिशों को अब नई गति मिलती दिखाई दे रही है। SEMICON India 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों से भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने और देश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
नई दिल्ली के यशोभूमि में 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित SEMICON India 2026 में सरकार, वैश्विक कंपनियों, निवेशकों, स्टार्टअप्स और विशेषज्ञों ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर चर्चा की।
भारत में बनने वाली चिप्स अब ग्राहकों तक पहुंच रहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में तैयार की जा रही चिप्स अब देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचने लगी हैं। उनके मुताबिक, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य जरूरी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया है।
उन्होंने वैश्विक इंडस्ट्री लीडर्स से भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार के तौर पर देखने और यहां मौजूद अवसरों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
सेमीकंडक्टर कंपनियों की बड़ी भागीदारी
Semicon India 2026 में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, CG Power, Intel समेत कई प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों की भागीदारी रही।
भारत का लक्ष्य केवल चिप असेंबली या पैकेजिंग तक सीमित रहने के बजाय एक ऐसा पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें चिप डिजाइन, फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, मशीनरी, मटेरियल, रिसर्च और टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हों।
Semicon 2.0 के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में Semicon 2.0 को मंजूरी दी थी। इसके लिए कुल ₹1,27,500 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। इस चरण का फोकस भारत में सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को और व्यापक बनाने पर है।
Semicon 2.0 के तहत छह प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया जा रहा है:
- चिप डिजाइन
- सेमीकंडक्टर मशीनरी और मटेरियल
- नए फैब की स्थापना
- एडवांस्ड पैकेजिंग और ATMP यूनिट्स
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट
- कुशल मानव संसाधन और टैलेंट डेवलपमेंट
सरकार के अनुसार, यह कार्यक्रम Semicon 1.0 के तहत बनाए गए आधार को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
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पांच सेमीकंडक्टर यूनिट्स में शुरू हुआ कमर्शियल प्रोडक्शन
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की प्रगति का एक अहम संकेत कमर्शियल प्रोडक्शन का शुरू होना है। 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री ने Mohali स्थित CDIL Semiconductor और Surat स्थित Suchi Semicon की नई कमर्शियल प्रोडक्शन लाइनों का वर्चुअल उद्घाटन किया।
इसके बाद भारत में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने वाली सेमीकंडक्टर यूनिट्स की संख्या पांच हो गई। इनमें Micron, Kaynes और CG Semi की यूनिट्स भी शामिल हैं।
भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम क्यों अहम है?
सेमीकंडक्टर आज स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम उपकरण, डिफेंस सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों के लिए बुनियादी तकनीक बन चुके हैं।
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान और कुछ चुनिंदा देशों पर उत्पादन की निर्भरता ने सेमीकंडक्टर सप्लाई को रणनीतिक मुद्दा बना दिया है। ऐसे में भारत घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों के लिए वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन बेस विकसित करना चाहता है।
चिप डिजाइन में भी बढ़ रही भारत की क्षमता
सरकार के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में लगभग 70,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही देश के सैकड़ों संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है।
Semicon 2.0 में इस टैलेंट पूल को आगे बढ़ाने के साथ डिजाइन से लेकर तैयार उत्पादों तक भारतीय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत में सेमीकंडक्टर निवेश का बढ़ता आधार
सरकार के अनुसार, Semicon 2.0 के तहत करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रतिबद्धताओं की जानकारी सामने आई है और पूरे इकोसिस्टम में लगभग एक लाख नई रोजगार संभावनाएं बनने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता विकसित करना लंबी अवधि की प्रक्रिया है। फैब, उन्नत पैकेजिंग, विशेष मशीनरी, रसायन, गैस और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ विकसित करना जरूरी होता है।
2030 तक सेमीकंडक्टर मार्केट का बड़ा लक्ष्य
भारत के सेमीकंडक्टर बाजार के भविष्य को लेकर अलग-अलग उद्योग अनुमानों में मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। IESA के एक अनुमान के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2024 में करीब 52 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक लगभग 103.4 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इस संभावित वृद्धि के पीछे स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ती चिप मांग को प्रमुख कारण माना गया है।

