ICAR ने नागालैंड के लिए धान की 7 नई जलवायु-सहिष्णु किस्मों का प्रदर्शन किया। फसल 115-120 दिन में तैयार होगी और संभावित उपज 5-7 टन प्रति हेक्टेयर है।
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुसंधान परिसर के नागालैंड केंद्र ने धान की सात नई किस्मों का प्रदर्शन किया है। इन किस्मों को नागालैंड की स्थानीय जलवायु और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इनकी प्रमुख विशेषताओं में कम समय में पकना, ब्लास्ट रोग के प्रति सहनशीलता और नमी की कमी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता शामिल है।
इन नई किस्मों की पकने की अवधि लगभग 115 से 120 दिन बताई गई है। इनकी संभावित उपज क्षमता 5 से 7 टन प्रति हेक्टेयर है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कम अवधि में तैयार होने वाली ये किस्में धान की खेती को अधिक उत्पादक बनाने और किसानों को स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।
115 से 120 दिन में तैयार होगी धान की फसल
धान की नई किस्मों की सबसे बड़ी खासियत इनका कम समय में पककर तैयार होना है। सामान्य तौर पर फसल की अवधि, मौसम में बदलाव और रोगों का प्रकोप किसानों के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में फसल प्रबंधन को आसान बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।
ICAR के नागालैंड केंद्र के अनुसार, इन किस्मों की संभावित उपज क्षमता 5 से 7 टन प्रति हेक्टेयर है। साथ ही, ये धान के ब्लास्ट रोग के प्रति सहनशील हैं और मध्यम स्तर तक नमी की कमी को सहन कर सकती हैं।
इन विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें नागालैंड की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, वास्तविक उपज मिट्टी, मौसम, सिंचाई, कृषि प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
नौ साल से अधिक के शोध के बाद तैयार हुईं नई किस्में
धान की इन सात किस्मों को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने नौ साल से अधिक समय तक अनुसंधान किया। इस दौरान लगभग 990 प्रजनन पंक्तियों का मूल्यांकन किया गया। शोध के जरिए ऐसी किस्मों की पहचान की गई, जिनमें कम समय में पकने और बेहतर उत्पादन देने की क्षमता थी।
इन उपलब्धियों और किस्मों की विशेषताओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए ICAR के नागालैंड केंद्र में किसान प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को खेतों में नई किस्मों का प्रदर्शन दिखाया गया और उनकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सोविमा, हेवनी, चुमौकेदिमा, धंसिरिपार और सिंगरीजन क्षेत्रों से आए कुल 56 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें किसान, कृषि विभाग के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक और कर्मचारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से जुड़े अधिकारी शामिल थे।
प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने धान की नई किस्मों की विशेषताओं को समझा। कुछ किसानों ने पहले ही इनमें से कुछ किस्मों की खेती की थी और अपने अनुभव साझा किए। अन्य किसानों ने भी इन किस्मों को अपनाने में रुचि दिखाई।
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किसानों तक नई कृषि तकनीक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में नागालैंड कृषि विभाग की संयुक्त सचिव लिमानेंला ने किसानों को नई किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त करने और उन्हें खेती में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों से इन किस्मों की उपयोगिता और विशेषताओं के बारे में दूसरे किसानों को भी जागरूक करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कम समय में पकने वाली फसल, बेहतर उपज क्षमता और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की विशेषताएं कृषि उत्पादकता बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं। इससे किसानों को अपनी फसल प्रणाली बेहतर बनाने और आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
ICAR के क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख डॉ. एच. कलिता ने भी वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्में संसाधनों के बेहतर उपयोग और खेती की लाभप्रदता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।
वहीं, चुमौकेदिमा जिले की कृषि अधिकारी मोइनला पोंगेन ने किसानों को इन किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। कृषि उपनिदेशक डेविड अवोमी ने भी बेहतर उपज और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली किस्मों को कृषि उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अप्रैल 2026 में मिली थी सात किस्मों को मंजूरी
धान की इन सात किस्मों को जारी करने की मंजूरी के लिए 21 अप्रैल 2026 को ICAR के नागालैंड केंद्र, मेडजिफेमा में राज्य बीज उपसमिति की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कृषि विभाग की संयुक्त सचिव लिमानेंला और कृषि सलाहकार एम. हथुंग यंथन ने इन किस्मों को जारी करने की मंजूरी दी थी।
कृषि सलाहकार यंथन ने नई किस्मों के विकास में वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों तक इन किस्मों को पहुंचाने और उन्हें खेती में अपनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
नागालैंड में धान उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा?
धान की इन सात नई किस्मों का प्रदर्शन नागालैंड में खेती को अधिक उत्पादक और जलवायु के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कम अवधि में पकने, ब्लास्ट रोग के प्रति सहनशीलता और नमी की कमी को मध्यम स्तर तक सहन करने जैसी विशेषताएं इन्हें स्थानीय किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बना सकती हैं।
वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और किसानों के बीच सहयोग से नई किस्मों और कृषि तकनीकों का प्रसार बढ़ाया जा सकता है। इससे किसानों को फसल प्रबंधन के बेहतर विकल्प मिलेंगे और क्षेत्र में धान की खेती की उत्पादकता तथा आजीविका सुधारने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

