गुवाहाटी में शिल्प समागम मेला 2026 में 75 कारीगर, 31 महिला शिल्पकारों सहित, हथकरघा और हस्तशिल्प की 40 किस्में प्रदर्शित करेंगे।
असम की राजधानी गुवाहाटी में शिल्प समागम मेला 2026 का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की इस पहल के तहत देशभर के कारीगर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। आठ दिवसीय मेले में कुल 75 कारीगर भाग ले रहे हैं, जिनमें 31 महिला कारीगर शामिल हैं। मेले में उत्पादों की लगभग 40 श्रेणियां प्रदर्शित की जाएंगी।
खानापारा स्थित फार्म गेट पर आयोजित यह मेला 28 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। आगंतुक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक यहां पहुंचकर पारंपरिक उत्पादों को देख और खरीद सकेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ना, उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाना और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
75 कारीगरों के उत्पादों से सजेगा मेला
शिल्प समागम मेले में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगर भी हिस्सा ले रहे हैं। यहां भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा की विविध परंपराओं से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।
मेले में शामिल कारीगरों को अपने उत्पादों की विशेषताएं लोगों तक पहुंचाने, नए ग्राहकों से संपर्क बनाने और बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिलेगा। महिला कारीगरों की भागीदारी भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयोजकों के अनुसार, यह मंच कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा। इससे पारंपरिक उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन मिलने के साथ कारीगरों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
भारत ट्यूलिप पहल से कारीगरों को मिलेगा बाजार का सहयोग
इस मेले में भारत ट्यूलिप यानी पारंपरिक कारीगर आजीविका उन्नयन कार्यक्रम को भी प्रमुखता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकारों के उत्पादों को खुदरा बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में सहायता करना है।
डिजिटल माध्यमों और व्यापक बाजार संपर्क के जरिए कारीगर अपने उत्पाद अधिक ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे बिक्री के नए रास्ते खुलने और पारंपरिक कला से जुड़ी आजीविका को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत ट्यूलिप का उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकला को संरक्षित करना और कारीगरों को बदलती बाजार जरूरतों के अनुरूप नए अवसर उपलब्ध कराना भी है।
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वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर
शिल्प समागम मेला अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सफाई मित्रों और विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
यह पहल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों के सहयोग से संचालित की जाती है:
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC)
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)
- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC)
इन संस्थानों से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए मंच उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से उनकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
मैसूरु के बाद गुवाहाटी में दूसरा आयोजन
शिल्प समागम मेला 2026 का पहला आयोजन कर्नाटक के मैसूरु में हुआ था। वहां दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और विभिन्न राज्यों के कारीगरों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।
गुवाहाटी में आयोजित दूसरा संस्करण पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों को देश की अलग-अलग शिल्प परंपराओं से परिचित कराने का अवसर प्रदान करेगा। विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों की भागीदारी से स्थानीय कला, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी
मेले के दौरान आगंतुकों और पात्र लाभार्थियों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा उसके राष्ट्रीय निगमों की कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और विकास कार्यक्रमों के बारे में जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा।
इस पहल के माध्यम से कारीगरों को उपलब्ध सहायता की जानकारी पहुंचाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और उनके कौशल को आय के स्थायी स्रोत में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प से प्रेरित यह पहल वंचित समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

