दलहन तिलहन की खेती: केवीके रामगढ़ दौरे पर डॉ. एम.एल. जाट ने किसानों को धान की परती जमीन पर दलहन-तिलहन उगाने और एकीकृत कृषि प्रणाली से आय बढ़ाने की सलाह दी।
दलहन तिलहन की खेती: धान की कटाई के बाद खाली पड़ी जमीन का उपयोग कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें स्थानीय जलवायु, मिट्टी की स्थिति और जमीन में मौजूद नमी के अनुसार दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करनी चाहिए। यह सुझाव भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के सचिव एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने दिया। वह रामगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।
धान की परती भूमि पर रबी फसलों की खेती करने पर जोर
डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि धान की कटाई के बाद खेतों को लंबे समय तक खाली छोड़ने के बजाय उनमें उपलब्ध नमी और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप रबी फसलों की खेती की जा सकती है। इससे जमीन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने विशेष रूप से दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पहल से खेती की लागत और संसाधनों के उपयोग को संतुलित करने में भी मदद मिल सकती है।
इस दौरे के दौरान भाकृअनुप के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव भी मौजूद रहे।
किसानों की जरूरतों के अनुसार आयोजित हों प्रशिक्षण कार्यक्रम
केवीके रामगढ़ की विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा करते हुए डॉ. जाट ने किसानों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका केवल नई तकनीकों की जानकारी देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं और आधुनिक खेती के व्यावहारिक तरीकों से भी परिचित कराना जरूरी है।
उन्होंने किसान-केंद्रित प्रसार गतिविधियों को मजबूत बनाने और एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) को प्रोत्साहित करने की बात कही। इस अवसर पर केवीके रामगढ़ की ओर से किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें खेतों का भ्रमण, कृषि तकनीकों की प्रदर्शनी और जरूरी कृषि आदानों का वितरण शामिल रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती के तरीकों से जोड़ना और उनकी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना था।
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एकीकृत कृषि प्रणाली से बढ़ेंगे कमाई के अवसर
डॉ. जाट ने एकीकृत कृषि प्रणाली को किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। इस प्रणाली के अंतर्गत किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को भी अपना सकते हैं।
इसके अलावा, स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के अनुसार मशरूम उत्पादन तथा सिलाई जैसी पूरक आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे और वे सालभर अलग-अलग गतिविधियों से कमाई के अवसर विकसित कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती के साथ अन्य आय-सृजन गतिविधियों को जोड़ना उपयोगी हो सकता है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और आजीविका को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए तैयार होगी सरल पुस्तिका
किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम के दौरान डॉ. एम.एल. जाट ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और खेती से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने प्रगतिशील किसानों को अपने सफल प्रयोगों और बेहतर कृषि पद्धतियों को दूसरे किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि अनुभवी किसान संसाधन व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपने खेतों में अपनाई गई सफल तकनीकों को साझा करके वे अन्य किसानों को भी नई पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक आसानी से पहुंचाने के लिए सरल और किसान-अनुकूल पुस्तिका विकसित करने पर जोर दिया। इस पुस्तिका में योजनाओं की पात्रता, मिलने वाले लाभ और आवेदन करने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से शामिल करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि किसान सरकारी सहायता का लाभ उठाने के लिए सही जानकारी प्राप्त कर सकें।
प्रगतिशील किसानों ने साझा किए खेती के अनुभव
कार्यक्रम में रामगढ़ जिले के प्रगतिशील किसानों ने डॉ. जाट के साथ अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने केवीके रामगढ़ से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की। इस दौरान डॉ. जाट ने केवीके परिसर में एक फलदार पौधा भी लगाया। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और बागवानी के महत्व को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने गीत और नृत्य के जरिए अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। डॉ. जाट ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी शैक्षिक योजनाओं और करियर संबंधी आकांक्षाओं के बारे में जाना। उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास, मेहनत और समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
टिकाऊ खेती और किसान-केंद्रित अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
रामगढ़ के केवीके दौरे के दौरान धान की परती भूमि का बेहतर उपयोग, फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
भाकृअनुप की इस पहल का उद्देश्य कृषि अनुसंधान और उसके व्यावहारिक लाभों को किसानों तक पहुंचाना, प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करना है। धान की कटाई के बाद खाली खेतों में उपयुक्त रबी फसलों की खेती और कृषि के साथ पूरक गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

