एनएफएससी छात्रवृत्ति ने फरीदाबाद की डॉ. प्रतिभा रानी को आर्थिक चुनौतियों से उबरकर पीएचडी पूरी करने और उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
आर्थिक परेशानियां अक्सर विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के सपनों के सामने बड़ी चुनौती बन जाती हैं। लेकिन सही समय पर मिलने वाली छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता इन मुश्किलों को कम कर सकती है। हरियाणा के फरीदाबाद की डॉ. प्रतिभा रानी की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है।
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफएससी) के तहत मिली सहायता ने प्रतिभा रानी को अपनी पीएचडी पूरी करने और अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया। सितंबर 2019 से शुरू हुई इस सहायता में फैलोशिप, मकान किराया भत्ता और आकस्मिक खर्च शामिल थे। इस योजना के तहत उन्हें करीब 18 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली।
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई
एनएफएससी सहायता मिलने से पहले प्रतिभा को उच्च शिक्षा के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। शैक्षणिक सहायता योजनाओं की सीमित जानकारी भी उनके लिए एक चुनौती थी।
उनका मानना है कि अनुसूचित जाति समुदाय की कई छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के कारण कठिन हो जाता है। विशेष रूप से लड़कियों की उच्च शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी इन चुनौतियों को और बढ़ा सकती है।
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छात्रवृत्ति ने दिया शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर
एनएफएससी से मिली आर्थिक सहायता ने प्रतिभा की वित्तीय चिंताओं को काफी हद तक कम किया। इससे उन्हें अपनी पढ़ाई और शोध पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिला।
उनके माता-पिता के सेवानिवृत्त होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालना भी एक चुनौती थी। ऐसे समय में मिली छात्रवृत्ति ने प्रतिभा को अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखने में मदद की।
12 वर्षों से वंचित बच्चों की शिक्षा में योगदान
अपनी पढ़ाई के साथ-साथ डॉ. प्रतिभा रानी लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक योगदान भी देती रही हैं। उन्होंने करीब 12 वर्षों तक वंचित बच्चों की शिक्षा में मदद की है।
उनका यह प्रयास दिखाता है कि व्यक्तिगत सफलता हासिल करने के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए भी काम करने को महत्व दिया।
राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में मिला शोध का अवसर
प्रतिभा की शैक्षणिक यात्रा ने उन्हें पेशेवर क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के अवसर दिए। उन्होंने नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की एक परियोजना में काम किया।
इस परियोजना के दौरान उन्हें एक वर्ष तक हर महीने 43 हजार रुपये की राशि मिली। इस अनुभव ने उनके शोध कौशल को मजबूत किया और उनके पेशेवर विकास में भी योगदान दिया।
प्रतिभा की सफलता से दूसरी छात्राओं को मिली प्रेरणा
डॉ. प्रतिभा रानी की उपलब्धि यह बताती है कि लक्षित छात्रवृत्ति योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहायता दे सकती हैं।
उनकी शैक्षणिक यात्रा ने उनके समुदाय की अन्य लड़कियों को भी उच्च शिक्षा, शोध और पेशेवर करियर की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
आज डॉ. प्रतिभा रानी के नाम के साथ जुड़ी यह पहचान उनकी मेहनत, शिक्षा और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उनकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक सीमाओं के बावजूद उच्च शिक्षा का सपना देखते हैं।

