मैसूरु में 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न। 12 राज्यों के कारीगरों ने भाग लिया, 83 स्टॉल लगे और 37 महिला कारीगरों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।
कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित इस मेले में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगरों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों से सजे इस आयोजन में हजारों लोग पहुंचे।
मेले का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारी समुदायों से जुड़े कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आजीविका को मजबूत बनाना था।
83 स्टॉल लगाए गए, 37 महिला कारीगरों ने लिया हिस्सा
शिल्प समागम मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे। इनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए, जिनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं। मेले में पारंपरिक खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी लगाए गए, जहां आगंतुकों को विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिला।
आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कारीगरों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।
मेले में हथकरघा साड़ियां, कांजीवरम साड़ियां, ब्लॉक प्रिंट वाले कपड़े, लकड़ी के खिलौने, चमड़े के उत्पाद, टेराकोटा की वस्तुएं, कृत्रिम आभूषण, बैग, पर्स, अगरबत्तियां, मसाले, अचार, शहद से बने उत्पाद और शीशम की लकड़ी से तैयार सजावटी सामान आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा बेडशीट और कुशन कवर जैसे घरेलू उपयोग के उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए।
तीन राष्ट्रीय निगमों के सहयोग से कारीगरों को मिला मंच
इस मेले का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने अपने तीन राष्ट्रीय निगमों के सहयोग से किया। इनमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) शामिल हैं।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के उप महाप्रबंधक श्री रजनीश बैंकर के अनुसार, शिल्प समागम का उद्देश्य पारंपरिक कला और शिल्प को प्रोत्साहित करने के साथ कारीगरों को नए ग्राहकों से जोड़ना है। इससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार में पहचान दिलाने और आय के स्थायी अवसर विकसित करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं। मैसूरु में आयोजित यह मेला वित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम आयोजन था।
also read: डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सामाजिक न्याय मंत्रालय की योजनाओं की समीक्षा की, पात्र…
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने किया स्टॉलों का निरीक्षण
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले ने मेले का दौरा कर विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने हस्तशिल्प, हथकरघा, लकड़ी के उत्पाद, टेराकोटा, चमड़े की वस्तुओं और अन्य पारंपरिक उत्पादों को देखा। उन्होंने खाद्य स्टॉलों का भी जायजा लिया।
इस अवसर पर मंत्री ने समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कारीगरों को अपने हुनर और उत्पादों के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने भी प्रदर्शनी स्थल का दौरा किया। उन्होंने स्टॉल संचालकों और आगंतुकों से बातचीत कर मेले की गतिविधियों का जायजा लिया। उनका मैसूरु दौरा मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आयोजित दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा का हिस्सा था।
कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल और यात्रा संबंधी सहायता
शिल्प समागम मेले में कारीगरों की भागीदारी आसान बनाने के लिए मंत्रालय की ओर से कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें निःशुल्क स्टॉल के साथ यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता, उत्पादों के परिवहन और दोपहर एवं रात के भोजन से संबंधित सहायता शामिल है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कारीगरों पर आयोजन में भाग लेने का आर्थिक बोझ कम करना है, ताकि वे अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने और बिक्री के नए अवसर तलाशने पर ध्यान दे सकें।
भारत ट्यूलिप पहल से बढ़ेगी हस्तशिल्प उत्पादों की ऑनलाइन पहुंच
कारीगरों के उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए मंत्रालय ने भारत ट्यूलिप यानी पारंपरिक कारीगर आजीविका उन्नयन कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल के तहत पारंपरिक उत्पादों को भारत ट्यूलिप ब्रांड के अंतर्गत प्रस्तुत कर उनकी डिजिटल माध्यमों से पहचान और ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं का संरक्षण करना, कारीगरों की आजीविका को मजबूत बनाना और उनके उत्पादों को व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचाना है।
मेले के माध्यम से मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई, ताकि पात्र लोगों को उपलब्ध वित्तीय सहायता, उद्यमिता और आजीविका से जुड़े अवसरों के बारे में जागरूक किया जा सके।
2026-27 में अन्य शहरों में भी लगेंगे शिल्प समागम मेले
मंत्रालय की योजना वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान गुवाहाटी, दिल्ली हाट (नई दिल्ली), जोधपुर और लखनऊ में भी शिल्प समागम मेलों का आयोजन करने की है।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय और उसके तीनों राष्ट्रीय निगम प्रमुख प्रदर्शनियों में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें 14 से 27 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2026 और फरवरी 2027 में फरीदाबाद में प्रस्तावित सूरजकुंड मेला शामिल हैं।

