असम के जोरहाट में नबनिधि गोगोई 8.45 हेक्टेयर में सब्जी, बागवानी, मछली और सुअर पालन कर रहे हैं। उनके एकीकृत खेती मॉडल से 12.75 लाख रुपये शुद्ध आय का अनुमान है।
असम के जोरहाट जिले के टेओक क्षेत्र स्थित मोरन गांव के किसान नबनिधि गोगोई ने आधुनिक तकनीकों और विविध कृषि गतिविधियों को अपनाकर एकीकृत खेती की मिसाल पेश की है। लगभग 8.45 हेक्टेयर भूमि पर वे सब्जियों की खेती, बागवानी, मछली पालन, सुअर पालन और पौध नर्सरी का संचालन कर रहे हैं। उनकी खेती का यह मॉडल कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदलने के साथ दूसरे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जोरहाट और असम कृषि विश्वविद्यालय के तकनीकी सहयोग से गोगोई ने अपने खेत में जल संरक्षण, जैविक खाद और सौर ऊर्जा आधारित कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाया है। वर्ष 2026-27 के लिए उनके पूरे एकीकृत कृषि मॉडल से लगभग 29.85 लाख रुपये की सकल आय और 12.75 लाख रुपये की शुद्ध आय का अनुमान लगाया गया है।
एक ही खेत में सब्जी, बागवानी, मछली और सुअर पालन
नबनिधि गोगोई ने अपनी खेती को कई गतिविधियों में विभाजित किया है, ताकि अलग-अलग स्रोतों से आमदनी प्राप्त की जा सके। उनके खेत में पेठा, विभिन्न प्रकार की सब्जियां, भूत जोलोकिया मिर्च, अमरूद और सुपारी की खेती होती है। इसके साथ ही वे मत्स्य पालन, सुअर पालन और पौध नर्सरी का व्यवसाय भी संचालित करते हैं।
इस एकीकृत व्यवस्था से उन्हें केवल एक फसल या कृषि गतिविधि पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। अलग-अलग उत्पादों से होने वाली आय खेती में जोखिम को कम करने और पूरे वर्ष कमाई के अवसर बनाए रखने में मदद करती है।
पेठा और सुअर पालन से हो रही अच्छी कमाई
गोगोई के अनुसार, पेठे की खेती से लगभग 6 लाख रुपये की सकल आय प्राप्त होती है, जिसमें करीब 3 लाख रुपये शुद्ध लाभ बचता है। वहीं, सुअर पालन से लगभग 14 लाख रुपये की सकल आय और 5.5 लाख रुपये के आसपास शुद्ध मुनाफा होने का अनुमान है।
इनके अतिरिक्त सब्जियों, भूत जोलोकिया मिर्च, अमरूद, सुपारी और मछली पालन से भी आय प्राप्त होती है। सभी कृषि गतिविधियों को मिलाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 29.85 लाख रुपये की सकल आय और 12.75 लाख रुपये की शुद्ध आय का अनुमान है।
यह मॉडल बताता है कि खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और नर्सरी जैसे व्यवसाय जोड़कर किसान अपनी आय के कई स्रोत विकसित कर सकते हैं।
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जल संरक्षण और सौर तकनीक से खेती को बनाया बेहतर
नबनिधि गोगोई ने अपने खेत में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पॉलीथीन आधारित जल-संचयन संरचनाएं तैयार की हैं। इनमें वर्षा जल एकत्रित किया जाता है, जिसका इस्तेमाल जरूरत के अनुसार सिंचाई में किया जा सकता है।
इसके अलावा, उन्होंने सौर ऊर्जा से संचालित कीट-प्रकाश जाल लगाए हैं। ये जाल रात के समय प्रकाश से आकर्षित होने वाले कुछ हानिकारक कीटों को पकड़ने में मदद करते हैं। इससे कीटों की निगरानी और प्रबंधन में सहायता मिलती है तथा कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने का अवसर मिलता है।
फसल चक्र अपनाने, वर्मीकम्पोस्ट और जैव-उर्वरकों के इस्तेमाल से भी उन्होंने खेती में संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान दिया है।
‘कृषि घर नर्सरी-कम-पशु आहार डीलर’ से बढ़ाया कारोबार
खेती के साथ व्यवसाय का विस्तार करते हुए गोगोई ने वर्ष 2025-26 में ‘कृषि घर नर्सरी-कम-पशु आहार डीलर’ नाम से एक नया कारोबार शुरू किया। यहां स्थानीय किसानों को पौध और पशु आहार एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाते हैं।
इस पहल से आसपास के किसानों को जरूरी कृषि सामग्री और पशु आहार खरीदने के लिए दूर के बाजारों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, गोगोई के लिए यह कृषि आधारित व्यवसाय से अतिरिक्त आय अर्जित करने का माध्यम बना है।
600 युवाओं ने अपनाई एकीकृत खेती की राह
भाकृअनुप-अटारी जोन 6, गुवाहाटी के अनुसार, नबनिधि गोगोई के कृषि मॉडल से प्रेरित होकर क्षेत्र के लगभग 600 शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने भी एकीकृत खेती को अपनाया है।
वर्ष 2022 में गुवाहाटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एग्री-होर्टी शो में उन्हें राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किसान का सम्मान भी मिला था। उनकी उपलब्धि ने यह दिखाया है कि खेती को आधुनिक तकनीकों, विविध उत्पादन और बाजार से जुड़ी गतिविधियों के साथ एक व्यावसायिक स्वरूप दिया जा सकता है।
किसानों के लिए प्रेरणादायक बना एकीकृत कृषि मॉडल
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, एकीकृत खेती में विभिन्न कृषि गतिविधियों को एक-दूसरे के पूरक के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे साल के अलग-अलग समय में आमदनी के अवसर मिलते हैं और किसी एक फसल की कीमत गिरने या उत्पादन प्रभावित होने पर दूसरी गतिविधियों से कुछ आर्थिक सहारा मिल सकता है।
जोरहाट जैसे क्षेत्रों में खेती, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़ना भूमि और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने का विकल्प बन सकता है।
कृषि विशेषज्ञों द्वारा गोगोई के खेत पर दूसरे किसानों के लिए भ्रमण आयोजित किए जाने से इस मॉडल की व्यावहारिक जानकारी साझा करने में मदद मिल रही है।

