जानें गुड़मार की खेती बीज और कलम से कैसे करें, नर्सरी तैयार करने का समय, रोपाई की विधि और लंबे समय तक उत्पादन से जुड़ी जरूरी बातें।
किसानों के लिए गुड़मार की खेती लंबे समय तक आमदनी का विकल्प बन सकती है। इस औषधीय पौधे की खासियत है कि उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में यह कई वर्षों तक उत्पादन दे सकता है। अनुसंधान विस्तार वृत्त रीवा के वनरक्षक उपेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, गुड़मार की खेती बीज और कलम दोनों विधियों से की जा सकती है। इसकी नर्सरी तैयार करने से लेकर खेत में पौधों की रोपाई तक कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
गुड़मार का पौधा लगाने में कितना खर्च आएगा?
गुड़मार के एक पौधे की कीमत 47 रुपये बताई जा रही है। इसकी खेती शुरू करने से पहले किसानों को पौधों की उपलब्धता, खेत की स्थिति और बाजार में मांग की जानकारी लेनी चाहिए। गुड़मार एक औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता है। औषधीय फसलों की खेती में अच्छी कमाई की संभावना हो सकती है, लेकिन वास्तविक मुनाफा उत्पादन, देखभाल की लागत और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
बीज और कलम से तैयार कर सकते हैं गुड़मार के पौधे
गुड़मार की खेती के लिए बीज और कलम, दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को खेत में लगाने से पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है। इसके लिए पॉलीथीन बैग या प्रो-ट्रे का उपयोग किया जा सकता है।
बुवाई के बाद लगभग तीन से चार महीने में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। इस दौरान नर्सरी में पौधों की उचित देखभाल करना जरूरी है, ताकि वे खेत में लगाने के लिए पर्याप्त विकसित हो सकें।
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गुड़मार की नर्सरी और रोपाई का सही समय
गुड़मार की खेती में समय का विशेष महत्व है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी नर्सरी तैयार करने के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है। वहीं, बारिश के मौसम में जुलाई और अगस्त के दौरान पौधों की रोपाई की जाती है।
हालांकि, रोपाई का सही समय स्थानीय जलवायु और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है। इसलिए बड़े स्तर पर खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि या वन विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
गुड़मार की खेती के लिए कैसी मिट्टी होनी चाहिए?
गुड़मार के पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए ऐसी जमीन का चयन करना चाहिए, जहां पानी आसानी से निकल सके। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पौधों की रोपाई के समय गड्ढों के बीच लगभग एक मीटर की दूरी रखने की जानकारी दी गई है। उचित दूरी रखने से पौधों को बढ़ने के लिए जगह मिलती है और उनकी देखभाल करना भी आसान हो सकता है।
एक बार रोपाई के बाद 25 साल तक उत्पादन का दावा
गुड़मार की खेती को लंबे समय तक चलने वाली औषधीय फसल के विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसके पौधों से अनुकूल परिस्थितियों और उचित प्रबंधन में कई वर्षों तक उत्पादन मिलने की संभावना बताई जाती है। कुछ जानकारी में इसकी उत्पादक अवधि 25 साल तक बताई गई है, लेकिन वास्तविक अवधि पौधों की किस्म, जलवायु, मिट्टी और देखभाल पर निर्भर करेगी।
इसलिए खेती शुरू करने से पहले पौधों की उत्पादक अवधि, रखरखाव की लागत और उपज खरीदने वाले व्यापारियों या कंपनियों के बारे में जानकारी जुटाना जरूरी है।
गुड़मार की खेती से पहले इन बातों का रखें ध्यान
गुड़मार की खेती शुरू करने की योजना बना रहे किसानों को पौधों की गुणवत्ता, रोपाई के समय, मिट्टी की जल निकासी और बाजार की मांग पर ध्यान देना चाहिए। औषधीय फसलों में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि उपज की बिक्री के लिए भरोसेमंद बाजार उपलब्ध होना भी जरूरी है।
कम लागत में खेती शुरू करने की संभावना के बावजूद किसानों को पहले छोटे क्षेत्र में पौधे लगाकर उनके विकास और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होने का आकलन करना चाहिए। इससे बड़े निवेश से पहले खेती के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।

