ओडिशा के ढेंकनाल निवासी राजेश ने पुनर्वास केंद्र की मदद से शराब की लत से उबरकर कैटरिंग का काम दोबारा शुरू किया और मासिक आय 16 हजार रुपये की।
शराब की लत से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ने वाले राजेश कुमार की कहानी बताती है कि सही समय पर परामर्श, चिकित्सा सहायता और व्यवस्थित पुनर्वास से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। ओडिशा के ढेंकनाल जिले के रहने वाले राजेश ने लंबे समय तक शराब की निर्भरता से संघर्ष किया। पुनर्वास सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा दी और खानपान से जुड़े अपने व्यवसाय को दोबारा शुरू कर आर्थिक स्थिति में सुधार किया।
राष्ट्रीय नशा मांग में कमी लाने की कार्य योजना (NAPDDR) के तहत उपलब्ध पुनर्वास सेवाओं ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सहायता से उन्हें नशे से उबरने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक जीवन में दोबारा सक्रिय होने का अवसर मिला।
23 वर्षों तक शराब की लत से जूझते रहे राजेश
ढेंकनाल निवासी 47 वर्षीय राजेश कुमार (बदला हुआ नाम) करीब 23 वर्षों से शराब की लत से परेशान थे। लंबे समय तक शराब पर निर्भरता का असर उनके पारिवारिक रिश्तों, निजी जीवन और कामकाज पर पड़ा। लगातार तनाव और पारिवारिक विवादों के कारण उनका वैवाहिक जीवन भी प्रभावित हुआ और अंततः पत्नी से अलगाव हो गया।
राजेश खानपान और कैटरिंग के क्षेत्र में स्वरोजगार से जुड़े थे। उनकी मासिक आय लगभग 10,000 रुपये थी, लेकिन नशे की समस्या के कारण कामकाज और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को संभालना कठिन हो रहा था। सीमित आर्थिक संसाधनों और सामाजिक अलगाव ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया।
इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन में सुधार लाने, आत्मसम्मान वापस पाने और कामकाज को व्यवस्थित करने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से पुनर्वास केंद्र पहुंचे
राजेश के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब उनकी मुलाकात ढेंकनाल में अरुण ग्रामीण कार्य संस्थान के अंतर्गत संचालित आशारा (ASHARA) एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA) से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता से हुई।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उनकी स्थिति को समझते हुए उन्हें पुनर्वास केंद्र तक पहुंचने में सहायता की। इसके बाद राष्ट्रीय नशा मांग में कमी लाने की कार्य योजना (NAPDDR) के अंतर्गत उन्हें पुनर्वास संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
इस पहल ने राजेश को शराब की लत से बाहर निकलने की दिशा में व्यवस्थित सहायता प्राप्त करने का अवसर दिया।
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एक महीने के पुनर्वास से मिला नया आत्मविश्वास
राजेश ने पुनर्वास केंद्र में एक महीने तक आवासीय सुविधा के साथ उपचार और परामर्श प्राप्त किया। इस अवधि में उन्हें नशामुक्ति संबंधी सेवाएं, व्यक्तिगत काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक सहयोग, व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन दिया गया।
केंद्र में उन्हें सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराया गया, जहां वे अपनी समस्याओं को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर काम कर सके।
पुनर्वास के दौरान उन्हें संयम बनाए रखने, अपनी दिनचर्या सुधारने और सामाजिक जीवन में फिर से सक्रिय होने के महत्व के बारे में मार्गदर्शन मिला। इस सहायता ने उन्हें अपने भविष्य को लेकर अधिक जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद की।
पुनर्वास के बाद दोबारा शुरू किया कैटरिंग का काम
पुनर्वास कार्यक्रम पूरा करने के बाद राजेश ने अपने खानपान और कैटरिंग से जुड़े व्यवसाय को फिर से शुरू किया। काम में नियमितता आने और आजीविका पर ध्यान केंद्रित करने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी मासिक आय 10,000 रुपये से बढ़कर लगभग 16,000 रुपये हो गई। यानी उनकी आमदनी में करीब 6,000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
यह बदलाव उनके लिए केवल आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अधिक व्यवस्थित जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी बना।
नशामुक्ति और पुनर्वास में सामाजिक सहयोग की अहम भूमिका
राजेश का अनुभव इस बात को रेखांकित करता है कि शराब की लत से जूझ रहे लोगों को केवल व्यक्तिगत इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि उचित उपचार, विशेषज्ञ परामर्श और सामाजिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है।
आशारा-आईआरसीए के माध्यम से मिली सहायता ने उन्हें पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक जीवन में दोबारा सक्रिय होने की दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग दिया। यह उदाहरण बताता है कि समय पर सहायता उपलब्ध होने से व्यसन से प्रभावित लोगों के लिए नई शुरुआत के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
नई शुरुआत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर कदम
राजेश कुमार की कहानी संघर्ष के बाद जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने की एक प्रेरक मिसाल है। लंबे समय तक शराब की लत से परेशान रहने के बाद पुनर्वास सेवाओं की मदद से उन्होंने अपने कामकाज को फिर से संभालने और आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए।
राष्ट्रीय नशा मांग में कमी लाने की कार्य योजना के अंतर्गत संचालित पुनर्वास सेवाओं का उद्देश्य भी व्यसन से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करना है।
राजेश का अनुभव बताता है कि सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, समय पर परामर्श, व्यवस्थित पुनर्वास और आजीविका के अवसर मिलकर किसी व्यक्ति को अधिक स्थिर, उत्पादक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ने में सहायता कर सकते हैं।

