ICAR-IARI में दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में ड्रिप सिंचाई, हाइड्रोपोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी गई।
खेती में पानी की खपत कम करने और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से ड्रिप सिंचाई, फसल विविधीकरण और हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकों को अपनाने की अपील की। वह नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) में आयोजित दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में मध्य प्रदेश के किसानों से संवाद कर रहे थे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विदिशा, रायसेन और सीहोर जिलों से आए किसानों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को जल प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और खेती में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
जल संरक्षण के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों पर जोर
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश के कृषि रोड मैप के तहत ICAR-IARI के जल प्रौद्योगिकी केंद्र (WTC) की ओर से किया गया। कार्यक्रम का विषय उच्च जल उत्पादकता के लिए सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष जोर के साथ उन्नत जल प्रबंधन तकनीक था।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी दी गई, जिनकी मदद से पानी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। इनमें सौर ऊर्जा से संचालित स्वचालित बेसिन सिंचाई, मल्चिंग के साथ ड्रिप सिंचाई और उप-सतही ड्रिप प्रणाली शामिल रहीं।
इसके अलावा किसानों को औषधीय पौधों और ड्रैगन फ्रूट की खेती में स्वचालित ड्रिप फर्टिगेशन के उपयोग के बारे में बताया गया। ड्रिप फर्टिगेशन के माध्यम से सिंचाई के पानी के साथ पौधों तक आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण में सिंचाई का सही समय तय करने, प्राकृतिक खेती में फूलों की फसलों के लिए जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई।
धान, सोयाबीन और गेहूं की खेती में पानी बचाने के तरीके सीखे
प्रशिक्षण में किसानों ने धान, सोयाबीन, गेहूं, चना और सब्जियों की खेती में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने वाली तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों की जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने और उपयुक्त कृषि पद्धतियां अपनाने से पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव कम करने और फसल उत्पादन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों को खेती में पानी की बचत को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई और फसल विविधीकरण के साथ हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।
इन तकनीकों का उद्देश्य खेती में संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना और किसानों को बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।
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हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग की तकनीकें देखीं
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को ICAR-IARI परिसर में विकसित विभिन्न कृषि मॉडल और तकनीकी सुविधाओं का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने हाइड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग, पॉलीहाउस खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) के मॉडल देखे।
हाइड्रोपोनिक्स ऐसी खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी के बिना पोषक तत्वों वाले पानी के घोल की मदद से पौधे उगाए जाते हैं। वहीं, वर्टिकल फार्मिंग में सीमित जगह का बेहतर उपयोग करने के लिए पौधों को कई स्तरों पर उगाया जाता है।
किसानों को एग्रीवोल्टाइक्स, स्वचालित सिंचाई व्यवस्था, अमृत सरोवर, बीज उत्पादन और आधुनिक कृषि उपकरणों से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।
इन तकनीकों के प्रदर्शन से किसानों को यह समझने का अवसर मिला कि आधुनिक कृषि प्रणालियों का उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में किस तरह किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी तकनीकी जानकारी
इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और ICAR-IARI के वरिष्ठ अधिकारियों तथा कृषि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में ICAR के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह, ICAR-IARI के निदेशक डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, ICAR के सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर.आर. बर्मन, ICAR-IARI के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ. आर.एन. पडारिया और जल प्रौद्योगिकी केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद सहित संस्थान के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को जल प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई प्रणालियों और नई कृषि तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
आधुनिक तकनीकों से खेती को अधिक जल-कुशल बनाने की पहल
दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीकों से जोड़ना और जल संसाधनों के कुशल उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा।
ड्रिप सिंचाई, वर्षा जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और संरक्षित खेती जैसी तकनीकें किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद कर सकती हैं। वहीं, हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग जैसे विकल्प सीमित जगह में खेती की नई संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं। साथ ही, किसानों को अपने खेतों की जरूरत, स्थानीय जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उपयुक्त तकनीक चुनने में सहायता मिल सकती है।

