नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लागू। किसानों को ₹15,000 तक जुर्माना देना पड़ सकता है। जानें नए नियम, जुर्माने की दरें और आदेश की अंतिम तारीख।
खेतों में फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण और आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए गुना जिले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट किशोर कुमार कन्याल ने धान और मक्का की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई जलाने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों को पर्यावरण मुआवजा देना पड़ सकता है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिला प्रशासन ने यह निर्णय आम लोगों के स्वास्थ्य, संपत्ति की सुरक्षा और जमीन की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163(1) के तहत जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और इसकी अवधि 10 फरवरी 2027 तक निर्धारित की गई है।
नरवाई जलाने पर कितना लगेगा जुर्माना?
प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, खेतों में फसल अवशेष जलाने पर भूमि के आकार के आधार पर पर्यावरण मुआवजा देना होगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुरूप निर्धारित राशि इस प्रकार है:
- 2 एकड़ या उससे कम जमीन: 2,500 रुपये प्रति घटना।
- 2 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ से कम जमीन: 5,000 रुपये प्रति घटना।
- 5 एकड़ से अधिक जमीन: 15,000 रुपये प्रति घटना।
किसानों को सलाह दी गई है कि धान और मक्का की कटाई के बाद बचे अवशेषों को आग लगाने के बजाय दूसरे उपयोगों में लाएं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और आसपास के खेतों में आग फैलने के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
हार्वेस्टर संचालकों के लिए भी जारी हुए निर्देश
प्रशासन ने फसल कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर संचालकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ रीपर यानी भूसा बनाने वाली मशीन का उपयोग करना अनिवार्य होगा, ताकि कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों से भूसा तैयार किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर संचालक को फसल कटाई शुरू करने से पहले कृषि अभियांत्रिकी विभाग के सहायक कृषि यंत्री कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा। उन्हें अधिकारियों के निर्देशानुसार फसल कटाई का रिकॉर्ड भी रखना होगा।
यदि कोई किसान स्ट्रॉ रीपर के इस्तेमाल के बिना कटाई कराने का दबाव बनाता है, तो हार्वेस्टर संचालक को इसकी जानकारी संबंधित ग्राम पंचायत के निगरानी अधिकारी, पंचायत सचिव या पुलिस थाने को देनी होगी।
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आगजनी रोकने के लिए मशीनों पर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी
हार्वेस्टर और स्ट्रॉ रीपर से काम करते समय चिंगारी निकलने के कारण आग लगने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए मशीन संचालकों को अग्नि सुरक्षा उपकरण रखने के साथ रेत और पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
प्रशासन ने खेतों के आसपास लगे बिजली ट्रांसफार्मरों से होने वाली संभावित आगजनी को लेकर भी निर्देश दिए हैं। जहां शॉर्ट सर्किट या चिंगारी से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा हो, वहां किसान की सहमति से ट्रांसफार्मर के आसपास 10×10 फीट का क्षेत्र खाली रखा जा सकता है।
मध्य प्रदेश राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री को खेतों के आसपास लगे ट्रांसफार्मरों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नरवाई जलाने पर रोक के लिए जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर समितियां गठित
फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण रखने के लिए जिला प्रशासन ने जिला स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया है।
जिला स्तरीय समिति में शामिल होंगे:
- संबंधित अनुविभाग के उपखंड मजिस्ट्रेट।
- जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी।
- अनुविभागीय कृषि अधिकारी।
- संबंधित तहसील के तहसीलदार।
- वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी।
- संबंधित नगरीय निकाय के सीएमओ या जोनल अधिकारी।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी।
इन समितियों की जिम्मेदारी किसानों को जागरूक करना, फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
ग्राम पंचायत स्तर पर भी होगी निगरानी
ग्राम पंचायत स्तर पर गठित निगरानी दल में सरपंच को अध्यक्ष और पंचायत सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। कृषि विस्तार अधिकारी, हल्का पटवारी, एवीएफओ और ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी को भी दल में शामिल किया गया है।
यह निगरानी दल गांवों में चौपाल आयोजित कर किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान और इसके लिए निर्धारित दंड की जानकारी देगा। प्रत्येक चौपाल की कार्यवाही का रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही, गांव में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी।
आदेश तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी होगी
जिला प्रशासन के अनुसार, प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पर्यावरण मुआवजे और अर्थदंड का निर्धारण संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाएगा।
यह आदेश एकपक्षीय रूप से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा। इसकी निर्धारित वैधता 10 फरवरी 2027 तक है।
किसानों के लिए क्या है जरूरी सलाह?
किसानों को फसल कटाई के बाद नरवाई जलाने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर स्ट्रॉ रीपर की मदद से भूसा तैयार किया जा सकता है या कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा सकता है।
इससे खेतों में आग लगने की आशंका कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

