NCSC के हस्तक्षेप के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने सरकारी वित्तीय योजनाओं में SC लाभार्थियों की योजना-वार और बैंक-वार अनिवार्य रिपोर्टिंग के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के हस्तक्षेप के बाद वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने सरकारी वित्तीय योजनाओं में अनुसूचित जाति (SC) के लाभार्थियों से संबंधित आंकड़ों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के निर्देश जारी किए हैं। अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में योजना एवं बैंक स्तर पर SC लाभार्थियों को मिली सहायता का रिकॉर्ड नियमित रूप से तैयार किया जाएगा।
SLBC और UTLBC को योजना-वार डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश
वित्तीय सेवा विभाग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBC) तथा केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों (UTLBC) के संयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।
इसके तहत संबंधित समितियों की नियमित समीक्षा बैठकों में चिन्हित सरकारी योजनाओं के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत का योजना-वार तथा बैंक-वार विवरण शामिल करना होगा।
संबंधित संस्थाओं को यह जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ नियमित रूप से साझा करने के साथ-साथ 9 अक्टूबर 2026 तक कार्रवाई रिपोर्ट वित्तीय सेवा विभाग को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
पहले से उपलब्ध बैंकिंग डेटा का होगा इस्तेमाल
वित्तीय सेवा विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए बैंकों और संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से मौजूद आंकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य नई या समानांतर रिपोर्टिंग व्यवस्था बनाने के बजाय डेटा संग्रह की प्रक्रिया को सरल रखना और आंकड़ों की परिभाषा एवं पद्धति में एकरूपता बनाए रखना है।
SLBC और UTLBC को कार्रवाई की प्रगति की अद्यतन जानकारी भी निर्धारित समय के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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NCSC ने उठाया था आंकड़ों की कमी का मुद्दा
यह कदम राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से उठाई गई चिंता के बाद सामने आया है। आयोग के सचिव विवेक कुमार देवांगन ने 24 सितंबर 2026 को वित्तीय सेवा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर सरकारी वित्तीय योजनाओं में SC लाभार्थियों से जुड़े आंकड़ों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं होने का मुद्दा उठाया था।
आयोग के अनुसार, SLBC की रिपोर्टों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), पीएम स्वनिधि, CGTMSE और MSME बिजनेस लोन जैसी प्रमुख योजनाओं में सहायता प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति परिवारों एवं लाभार्थियों का प्रतिशत स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था।
संवैधानिक दायित्व के लिए जरूरी है सटीक डेटा
NCSC ने कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए विश्वसनीय और वर्गीकृत आंकड़ों की आवश्यकता है। डेटा के अभाव में आयोग के संवैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन में कठिनाई उत्पन्न हो रही थी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(5)(सी) के तहत आयोग को अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का आकलन करने सहित विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
5 अक्टूबर को जारी हुए निर्देश
NCSC की ओर से उठाए गए मुद्दे के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के SLBC एवं UTLBC संयोजकों को निर्देश जारी किए।
इन निर्देशों के जरिए सरकारी वित्तीय योजनाओं के लाभ अनुसूचित जाति समुदाय तक किस स्तर तक पहुंच रहे हैं, इसका अधिक स्पष्ट और मापनीय आकलन किया जा सकेगा।
वित्तीय समावेशन में बढ़ेगी पारदर्शिता
योजना-वार और बैंक-वार SC लाभार्थियों के आंकड़े उपलब्ध होने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि वित्तीय समावेशन से जुड़ी योजनाओं का लाभ लक्षित समुदायों तक किस हद तक पहुंच रहा है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कहा है कि वह इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी जारी रखेगा। आयोग संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय करते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि सरकारी वित्तीय योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति के पात्र लाभार्थियों तक समान, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचे।

