पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में JAAC के आंदोलन से बढ़ा तनाव, नागरिक अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और LoC को लेकर प्रदर्शनकारियों की चेतावनी चर्चा में।
पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पिछले कई महीनों से सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। आंदोलन की अगुवाई Joint Awami Action Committee (JAAC) कर रही है। इस संगठन में व्यापारी, नागरिक समाज से जुड़े लोग और अन्य स्थानीय समूह शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आर्थिक राहत, राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
चुनावी व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी
प्रदर्शन के बीच क्षेत्र की विधानसभा में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा है। JAAC और उसके समर्थकों का कहना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है।
जुलाई 2026 में विधानसभा चुनावों के दौरान भी इसी मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ा था। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में मौतों को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर रहा। JAAC ने कई कार्यकर्ताओं के मारे जाने का दावा किया, जबकि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमले के आरोप लगाए।
जून से जारी है विरोध प्रदर्शन
JAAC के नेतृत्व में जून 2026 से आंदोलन के अलग-अलग चरण देखने को मिले हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगह बंद, धरना और मार्च आयोजित किए गए। इंटरनेट और संचार सेवाओं पर प्रतिबंध की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
जुलाई में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने क्षेत्र में हुई मौतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की अपील की थी। उस समय उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जून से हुई हिंसा में कम से कम 31 लोगों की मौत की बात सामने आई थी। बाद की घटनाओं में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
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LoC पार करने की चेतावनी क्यों चर्चा में है?
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानीय लोगों और आंदोलन से जुड़े नेताओं की ओर से LoC के पार जाने और भारत की तरफ मानवीय सहायता की मांग जैसे बयान सामने आए हैं। जुलाई में JAAC की ओर से पाकिस्तान द्वारा मांगें नहीं माने जाने के बाद आंदोलन तेज करने की बात कही गई थी। कुछ नेताओं ने हालात खराब होने पर LoC के जरिए लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान पहुंचाने की अपील भी की थी।
हालांकि, LoC पार करने की बात को पूरे क्षेत्र की जनता की सामूहिक स्थिति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। यह कुछ प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से सामने आई मांग या चेतावनी के तौर पर रिपोर्ट की गई है।
JAAC और सरकार के बीच टकराव
JAAC को स्थानीय प्रशासन ने प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है। सरकारी अधिकारियों ने संगठन पर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने और सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा भड़काने के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ JAAC और उसके समर्थक सरकार पर आंदोलन को दबाने तथा नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं।
इस तरह मौजूदा संकट में दोनों पक्षों के आरोपों और मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे मौजूद हैं। स्वतंत्र स्रोतों की रिपोर्टिंग भी घटनाओं के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखती है।
पाकिस्तान के सामने क्या चुनौती है?
पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में जारी आंदोलन अब केवल महंगाई या आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं रहा है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक अधिकार, सुरक्षा कार्रवाई और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दे भी आंदोलन के केंद्र में आ गए हैं।
सितंबर 2026 में भी JAAC की ओर से सरकार के सामने कई शर्तें रखे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इनमें गिरफ्तार लोगों की रिहाई, इंटरनेट सेवाओं की बहाली, सुरक्षा बलों की वापसी और अन्य मांगें शामिल थीं।
फिलहाल क्षेत्र की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत, सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में घटनाक्रम की दिशा तय करने वाले प्रमुख विषय रहेंगे।

