न्यूयॉर्क में IBSA बैठक में UNSC सुधार, भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता, आतंकवाद, गाजा और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर अहम चर्चा हुई।
भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की IBSA बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वकारी बनाने के लिए समयबद्ध और टेक्स्ट-आधारित वार्ता शुरू करने पर जोर दिया गया। संयुक्त बयान में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी तथा अफ्रीकी देशों की स्थायी प्रतिनिधित्व की आकांक्षाओं का समर्थन किया गया।
UNSC सुधार पर IBSA का जोर
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई IBSA मंत्रिस्तरीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर मौजूदा गतिरोध पर चिंता जताई गई। तीनों देशों ने औपचारिक और टेक्स्ट-आधारित वार्ता शुरू करने की आवश्यकता बताई, ताकि सुधार प्रक्रिया को ठोस परिणाम तक पहुंचाया जा सके।
IBSA मंत्रियों ने कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों को संयुक्त राष्ट्र की संस्थागत संरचना में भी प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। साथ ही, सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा की भूमिका को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन
बैठक में भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन किया गया। इसके साथ ही अफ्रीकी देशों को सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व दिए जाने की उनकी मांग का भी समर्थन दोहराया गया।
UNSC सुधार भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत लगातार सुरक्षा परिषद के स्थायी और गैर-स्थायी दोनों वर्गों में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत की पहल को समर्थन
IBSA देशों ने G20 के तहत भारत की ओर से प्रस्तावित Critical Minerals Circularity Initiative का समर्थन किया। इस पहल में महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण, शहरी खनन और पुरानी बैटरियों के दोबारा इस्तेमाल जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर है।
बैठक में विकासशील देशों के खनिज क्षेत्र में निवेश और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की कमी से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। खनिज संपदा वाले देशों में स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया गया।
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पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
IBSA विदेश मंत्रियों ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में नागरिकों की हत्या की निंदा की। संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड अपनाने का विरोध किया गया।
तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई। बयान में अल-कायदा, ISIS/Daesh, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम भी शामिल किया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (CCIT) को जल्द आगे बढ़ाने की अपील की गई।
गाजा और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता
बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और गाजा में जारी मानवीय संकट पर भी चर्चा हुई। IBSA देशों ने गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के लिए दो-राज्य समाधान के समर्थन को दोहराया। तीनों देशों ने क्षेत्रीय तनाव के वैश्विक दक्षिण की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।
बहुपक्षवाद और ग्लोबल साउथ पर फोकस
बैठक में नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था, विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रभावी बनाने के लिए सहयोग जारी रखने की बात कही।
IBSA के तहत विकासशील देशों के लिए सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम IBSA Fund भी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह फंड गरीबी और भुखमरी से जुड़े विकास लक्ष्यों के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग को समर्थन देता है।
जलवायु न्याय और वैश्विक आर्थिक सुधार पर भी चर्चा
मंत्रियों ने जलवायु न्याय, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में सुधार से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए। WTO और ब्रेटन वुड्स संस्थानों में विकासशील तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
IBSA मंच भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच राजनीतिक समन्वय, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विकास संबंधी साझेदारी का प्रमुख माध्यम है। तीनों देश वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए इस समूह के माध्यम से सहयोग करते रहे हैं।

