रबी सीजन में गेहूं की उन्नत किस्म HI 1683 किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है। जानें इसकी पैदावार, पोषण गुण और खेती से जुड़ी जरूरी बातें।
रबी सीजन की शुरुआत के साथ किसान गेहूं की ऐसी उन्नत किस्म की तलाश में हैं, जिससे बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी गुणवत्ता वाला अनाज प्राप्त हो सके। ऐसे किसानों के लिए पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकती है। यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, इंदौर से संबंधित है।
उपयुक्त मौसम, सही कृषि प्रबंधन और अनुकूल परिस्थितियों में इस किस्म से 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक संभावित उत्पादन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। हालांकि वास्तविक पैदावार मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बुवाई के समय और फसल प्रबंधन जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
गेहूं की HI 1683 किस्म क्यों है खास?
पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 को ब्रेड गेहूं यानी Triticum aestivum श्रेणी में रखा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में अच्छी उत्पादन क्षमता, विभिन्न परिस्थितियों में स्थिर उपज और बेहतर दाना गुणवत्ता शामिल हैं।
इस किस्म से प्राप्त गेहूं का इस्तेमाल रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों जैसे रोटी, चपाती और आटा बनाने में किया जा सकता है। यही वजह है कि यह किस्म उत्पादन के साथ-साथ खाद्य उपयोग के लिहाज से भी किसानों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
HI 1683 से कितनी मिल सकती है पैदावार?
पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 की औसत उपज करीब 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। वहीं, बेहतर कृषि प्रबंधन और अनुकूल परिस्थितियों में इसकी संभावित उपज 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।
हालांकि किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी फसल की वास्तविक पैदावार हर खेत में एक जैसी नहीं होती। मिट्टी की उर्वरता, तापमान, पानी की उपलब्धता, बुवाई का समय, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन और फसल में रोग-कीट की स्थिति उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
also read: बिहार में औषधीय पौधों की खेती पर मिलेगा ₹36 हजार तक अनुदान, 100…
बायोफोर्टिफाइड गेहूं की क्या खासियत है?
HI 1683 की एक प्रमुख विशेषता इसका बायोफोर्टिफाइड होना है। बायोफोर्टिफिकेशन के जरिए फसल के पोषण संबंधी गुणों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस गेहूं में लगभग:
- प्रोटीन: 11.7 प्रतिशत
- आयरन: 40.4 ppm
- जिंक: 38.3 ppm
पाया जाता है। इस वजह से HI 1683 को केवल उत्पादन क्षमता के नजरिए से ही नहीं, बल्कि अनाज की पोषण गुणवत्ता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण किस्म माना जा सकता है।
किसानों को बुवाई से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसानों को किसी भी नई गेहूं की किस्म की बड़े क्षेत्र में बुवाई करने से पहले अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से उसकी उपयुक्तता की जानकारी लेनी चाहिए।
बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है:
- प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का इस्तेमाल करें।
- अपने क्षेत्र के अनुसार सही समय पर बुवाई करें।
- खेत की मिट्टी की स्थिति के अनुसार खाद और उर्वरक का प्रयोग करें।
- फसल की जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें।
- रोग और कीट की नियमित निगरानी करें।
- स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती की तकनीक अपनाएं।
किसान अपने क्षेत्र में HI 1683 की उपयुक्तता और अनुशंसित बीज दर व खेती तकनीक की जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

