पंजाब में नशा विरोधी अभियान 2.0 के तहत 41,850 FIR और भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद, VDC की अहम भूमिका सामने आई।
Punjab में नशा उन्मूलन को लेकर चल रही मुहिम अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। राज्य सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे “नशा विरोधी अभियान 2.0” ने न केवल तस्करों के नेटवर्क को कमजोर किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर सामाजिक भागीदारी का एक नया मॉडल भी पेश किया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Baltej Pannu ने इस अभियान के ताजा आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अब तक की कार्रवाई ने नशा तस्करी के बड़े गिरोहों को गहरी चोट पहुंचाई है।
जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में इस अभियान के तहत कुल 41,850 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। इसके अलावा, पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हजारों किलोग्राम नशीले पदार्थ भी जब्त किए हैं। इनमें 2,569 किलोग्राम हेरोइन, 35,058 किलोग्राम खसखस (पोपी हस्क) और 4,599 किलोग्राम कोकीन जैसी खतरनाक ड्रग्स शामिल हैं। ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य में नशे के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल पुलिस या प्रशासन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आम लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली है। गांवों में गठित ग्राम रक्षा समितियां (VDC) इस अभियान की रीढ़ बनकर उभरी हैं। ये समितियां स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। इससे न केवल अपराध पर लगाम लग रही है, बल्कि समाज में जागरूकता का स्तर भी बढ़ रहा है।
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सरकार ने इस बार नशा तस्करों के खिलाफ बहुआयामी रणनीति अपनाई है। केवल गिरफ्तारियों तक सीमित रहने के बजाय, बड़े तस्करों की संपत्तियों को जब्त करने और उनके आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक और इंटेलिजेंस के बेहतर इस्तेमाल से नशा तस्करी के पूरे तंत्र को खत्म करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में राज्य सरकार इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रही है। सरकार का मानना है कि केवल कानून लागू करने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि समाज की भागीदारी से ही स्थायी बदलाव संभव है।
इस बीच, राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष का दावा है कि पिछले वर्षों में नशे के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए गए, जबकि वर्तमान सरकार ने जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाए हैं। वहीं, विपक्ष इस अभियान के आंकड़ों और प्रभाव को लेकर सवाल उठाता रहा है।
फिलहाल, नशा विरोधी अभियान 2.0 ने पंजाब में एक मजबूत संदेश जरूर दिया है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और आने वाले समय में कार्रवाई और तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह सख्ती और जनभागीदारी बनी रही, तो “नशा मुक्त पंजाब” का लक्ष्य धीरे-धीरे साकार हो सकता है।

