चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान विपक्ष ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए, कहा—लोकतंत्र पर दबाव, संघर्ष जारी रहेगा।
Chandigarh में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत करते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है और विपक्षी राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है।
विपक्ष का कहना है कि ED की कार्रवाई मुख्य रूप से उन्हीं राज्यों में देखने को मिलती है जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह संयोग है या फिर एक सोची-समझी रणनीति, जिसके तहत राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि जो लोग जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं या जनहित के मुद्दों पर काम करते हैं, उन्हें ED नोटिस भेजे जाते हैं या फिर कानूनी कार्रवाई के जरिए दबाव में लाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से राजनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
इस दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि डर और दबाव के जरिए लोकतंत्र को खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने पंजाब की धरती का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्रांतिकारी भूमि हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ी रही है और आगे भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठती रहेगी।
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विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि देश और संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह संकल्प दोहराया कि वे पूरी ईमानदारी के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर सकते हैं। ED की कार्रवाई को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं, और यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ में हुई इस प्रेस वार्ता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में राजनीतिक दलों के बीच टकराव तेज हो रहा है और लोकतंत्र, संस्थाओं की स्वतंत्रता तथा राजनीतिक निष्पक्षता जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अधिक चर्चा में रहने वाले हैं।

