लोकसभा सीट पुनर्निर्धारण 2026 को लेकर CM भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए, महिला आरक्षण और पारदर्शिता पर दी प्रतिक्रिया।
लोकसभा सीट पुनर्निर्धारण 2026 को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। इसी बीच पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पारदर्शिता और समानता के आधार पर लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे किसी भी प्रकार के राजनीतिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यदि लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और न्यायसंगत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव न हो।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा सीट पुनर्निर्धारण 2026 के लिए एक समान और स्थायी राष्ट्रीय मानदंड तैयार किया जाना चाहिए, जो सभी राज्यों पर बराबरी से लागू हो। उनके अनुसार, यह जरूरी है कि देश की एकता और संतुलन बनाए रखने के लिए इस प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष रखा जाए।
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महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो यह व्यवस्था सभी 543 लोकसभा सीटों पर समान रूप से लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए ठोस और स्पष्ट नीति की आवश्यकता है, जिससे देशभर में समान अवसर सुनिश्चित हो सकें।
इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का सीधा प्रभाव राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा। ऐसे में इस प्रक्रिया को पारदर्शी और संतुलित बनाना बेहद आवश्यक है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी कहा कि देश में किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और सभी राज्यों के साथ संवाद होना चाहिए। इससे न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि सभी पक्षों का विश्वास भी कायम रहेगा।
कुल मिलाकर, लोकसभा सीट पुनर्निर्धारण 2026 को लेकर उठे ये सवाल आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और किस प्रकार सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाता है।

