पराली जलाने पर केंद्र सरकार सख्त। दोपहर 3 बजे के बाद खेतों की निगरानी, ड्रोन से जांच और अधिकारियों की जवाबदेही पर जानें नए निर्देश।
सर्दियों से पहले पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अब खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों को अधिक सतर्क रहना होगा। खासतौर पर दोपहर 3 बजे के बाद खेतों की निगरानी बढ़ाने और आग की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।
14 अक्टूबर 2026 को हुई समीक्षा बैठक में राज्यों को पराली प्रबंधन से जुड़े उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही किसानों को पराली न जलाने के लिए जरूरी मशीनें और वैकल्पिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देने को कहा गया है।
दोपहर 3 बजे के बाद खेतों पर रहेगी खास नजर
पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने के लिए अब खेतों की निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। निर्देशों के अनुसार, दोपहर 3 बजे के बाद विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। आशंका है कि कुछ स्थानों पर किसान देर से खेतों में आग लगाते हैं, जिससे सैटेलाइट के जरिए घटनाओं का पता लगाने में मुश्किल हो सकती है।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों को केवल तकनीकी निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर खेतों में जाकर भी जांच करनी होगी। किसी क्षेत्र में पराली जलने की सूचना मिलने पर मौके की स्थिति का पता लगाकर उचित कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है।
पराली जलने पर अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए अब निगरानी करने वाले सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी अहम होगी। खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सक्रिय रहने और निगरानी में लापरवाही से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक 34 जिलों में विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। इन टीमों का काम पराली जलाने से जुड़ी घटनाओं की जानकारी जुटाना और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर जरूरी कार्रवाई में सहयोग करना है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खेतों में आग लगने की घटनाओं की समय पर पहचान करना और रोकथाम के उपायों को प्रभावी बनाना है।
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सैटेलाइट के साथ ड्रोन से भी होगी निगरानी
पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने के लिए तकनीक और जमीनी निरीक्षण, दोनों का इस्तेमाल किया जाएगा। सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी के अलावा ड्रोन के जरिए खेतों और प्रभावित इलाकों पर नजर रखने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन से आग लगने की स्थिति और संबंधित क्षेत्र की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच कर सकती है।
हरियाणा में भी जिला और ब्लॉक स्तर पर निगरानी मजबूत करने, विशेष टीमों के माध्यम से जानकारी जुटाने और देर शाम तक सतर्कता बनाए रखने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे पराली जलाने की सूचना मिलने पर प्रशासन को जल्द कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मिलेंगे विकल्प
सरकार का जोर केवल पराली जलाने पर रोक लगाने तक सीमित नहीं है। किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पराली को खेत में संभालने, इकट्ठा करने और दूसरे उपयोगों के लिए तैयार करने वाली मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को उपलब्ध योजनाओं के तहत मशीनों पर मिलने वाली सब्सिडी और अन्य सहायता की जानकारी भी लेनी चाहिए।
किसान अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करके पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों, सरकारी सहायता और वैकल्पिक उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पराली जलाने से रोकने के लिए क्यों जरूरी है सख्ती?
खेतों में फसल अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देता है। इसका असर आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। सर्दियों के दौरान मौसम की परिस्थितियां प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है।
इसी वजह से पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी, समय पर कार्रवाई और किसानों को वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

