छिंदवाड़ा में कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने नरवाई नहीं जलाने की अपील की। जानें सुपर सीडर, ड्रोन तकनीक और प्राकृतिक खेती से जुड़ी अहम जानकारी।
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है। चौरई तहसील के चांद ग्राम में आयोजित कृषक संगोष्ठी में कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायण ने किसानों से नरवाई नहीं जलाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान सुपर सीडर मशीन का लाइव डेमोंस्ट्रेशन करके किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके बताए गए। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरकों के छिड़काव का प्रदर्शन भी किया गया, ताकि किसान नई कृषि तकनीकों के उपयोग और उनके लाभों को समझ सकें।
सुपर सीडर से नरवाई प्रबंधन की दी गई जानकारी
कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने कहा कि नरवाई प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए ऐसे उपाय अपनाने चाहिए, जिनसे खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोका जा सके। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।
कृषक संगोष्ठी में सुपर सीडर मशीन के प्रदर्शन के माध्यम से बताया गया कि आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों को जलाए बिना खेत में अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। इससे किसानों को नरवाई के उचित प्रबंधन और खेती के काम समय पर पूरा करने में मदद मिल सकती है।
ड्रोन से नैनो उर्वरकों के छिड़काव का प्रदर्शन
कार्यक्रम में ड्रोन की मदद से नैनो उर्वरकों का छिड़काव करके आधुनिक कृषि तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को तकनीक आधारित खेती के प्रति जागरूक करना और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व को समझाना था।
किसानों को धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत मिट्टी के स्वास्थ्य की सुरक्षा और संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी गई।
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राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर महिला कृषकों का सम्मान
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में उन्नत खेती करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाली कृषि सखियों, प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों और बायो रिसोर्स सेंटर संचालित करने वाले कृषकों को भी सम्मानित किया गया।
इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करना और दूसरे किसानों को नई तकनीकों तथा टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
कम पानी में चना और सरसों की खेती करने की सलाह
कृषक संगोष्ठी में किसानों को पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल चयन करने की सलाह दी गई। कम पानी में चना और सरसों की खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया, ताकि सीमित सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
किसानों को प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और कृषि में नवाचार के महत्व के बारे में भी बताया गया। इन उपायों से खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कृषि अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की रही मौजूदगी
इस कृषक संगोष्ठी में डीडीए श्री मॉरिश नाथ, पीडी आत्मा श्री धीरज ठाकुर, कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के. झाड़े, कृषि यंत्री श्री अश्विनी सिंह, एसडीओ श्री नीलकंठ पटवारी, एडीए श्रीमती सरिता सिंह, श्री सी.एम. अवस्थी, डिप्टी पीडी श्रीमती प्राची कौतू, सुश्री आकांक्षा शिवकर और एसएडीओ श्रीमती निराली आर्या सहित आत्मा परियोजना के कर्मचारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान, खाद-बीज-उर्वरक संघ के प्रतिनिधि और फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

