उत्तराखंड सरकार ने दिव्यांग युवाओं के लिए मुफ्त सिविल सेवा कोचिंग योजना शुरू की है। जानें UPSC-UKPSC की तैयारी, पात्रता और मिलने वाली सुविधाओं की पूरी जानकारी।
उत्तराखंड सरकार ने दिव्यांग युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना शुरू की है। इस पहल के तहत पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराने का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को कम करना, समान अवसर उपलब्ध कराना और दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।
देहरादून और हल्द्वानी में शुरू होंगे कोचिंग केंद्र
योजना के तहत प्रदेश के दो प्रमुख शहरों में कोचिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। देहरादून में गढ़वाल मंडल के अभ्यर्थियों और हल्द्वानी में कुमाऊं मंडल के युवाओं को सुविधा देने पर ध्यान दिया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों को सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिलेगी। योजना में आवासीय और गैर-आवासीय, दोनों तरह की कोचिंग की व्यवस्था शामिल है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
योजना के तहत अभ्यर्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई और प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
- मुफ्त अध्ययन सामग्री: दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए ब्रेल लिपि की किताबें, स्क्रीन रीडर के अनुकूल डिजिटल सामग्री और ऑडियो लेक्चर की सुविधा।
- सुगम कोचिंग केंद्र: रैंप, लिफ्ट, विशेष शौचालय और व्हीलचेयर के अनुकूल बैठने की व्यवस्था।
- आवास और भोजन: पात्र आवासीय अभ्यर्थियों के लिए हॉस्टल और भोजन की सुविधा।
- परिवहन सहायता: गैर-आवासीय अभ्यर्थियों के लिए मासिक परिवहन भत्ते का प्रावधान।
- डिजिटल संसाधन: कंप्यूटर लैब, डिजिटल उपकरण, नियमित मॉक टेस्ट और व्यक्तिगत मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए पढ़ाई का अनुकूल माहौल तैयार करना और परीक्षा की तैयारी में आने वाली चुनौतियों को कम करना है।
also read: पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना में बच्चों के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवा…
विशेषज्ञ शिक्षक और अधिकारियों से मिलेगा मार्गदर्शन
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। इसमें भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, अर्थव्यवस्था, भूगोल और समसामयिक घटनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पढ़ाई कराई जाएगी।
इसके अलावा, अनुभवी शिक्षक और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अभ्यर्थियों को परीक्षा की रणनीति तथा साक्षात्कार की तैयारी में मदद कर सकते हैं। मूक-बधिर अभ्यर्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सांकेतिक भाषा जानने वाले सहायक शिक्षकों की व्यवस्था भी शामिल है।
मुफ्त कोचिंग योजना के लिए क्या है पात्रता?
योजना का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
- आवेदक उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना चाहिए।
- अभ्यर्थी के पास कम से कम 40 प्रतिशत प्रमाणित दिव्यांगता होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता संबंधित UPSC या UKPSC परीक्षा के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
- अभ्यर्थी ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक किया हो या संबंधित परीक्षा के नियमों के अनुसार अंतिम वर्ष में हो।
- परिवार की वार्षिक आय योजना के तहत निर्धारित मानकों के भीतर होनी चाहिए।
ध्यान दें: आवेदन की तारीख, चयन प्रक्रिया, आय सीमा और जरूरी दस्तावेजों की अंतिम जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखना आवश्यक है।
दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
उत्तराखंड सरकार की इस योजना का मकसद दिव्यांग युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। मुफ्त कोचिंग और जरूरत के अनुसार सहायक सुविधाएं मिलने से उन अभ्यर्थियों को मदद मिल सकती है, जिन्हें आर्थिक या भौतिक बाधाओं के कारण तैयारी करने में परेशानी होती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों पर जोर दिया है। सरकार की इस पहल का लक्ष्य दिव्यांग युवाओं को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

