मैसूरु में शिल्प समागम मेला 2026 का केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दौरा किया। जानें 83 स्टॉल, महिला कारीगरों की भागीदारी और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी।
मैसूरु में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 में देशभर के कारीगर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मेले का दौरा कर वंचित वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार की योजनाओं और पहलों पर प्रकाश डाला।
कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 चल रहा है। 11 अक्टूबर से शुरू हुआ यह मेला 19 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सफाई कर्मचारी समुदायों से जुड़े कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री और प्रचार के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।
शिल्प समागम मेले में 83 स्टॉल, 37 महिला कारीगर भी शामिल
इस मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए हैं। इनमें 37 महिला कारीगर भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। आयोजन में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (NSFDC) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह मेला कारीगरों को अपने पारंपरिक उत्पाद सीधे ग्राहकों और संभावित खरीदारों तक पहुंचाने का अवसर देता है। इससे उनके उत्पादों की पहचान बढ़ाने, नए बाजारों से जुड़ने और आजीविका के साधनों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इस आयोजन को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले तीन राष्ट्रीय निगमों ने संयुक्त रूप से आयोजित किया है। इनमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) शामिल हैं। ये संस्थाएं पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके आर्थिक विकास में सहयोग करती हैं।
रामदास अठावले ने कारीगरों के उत्पादों का किया निरीक्षण
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने मेले में विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया और वहां प्रदर्शित उत्पादों को देखा। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
मेले में हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्ती, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंटिंग से तैयार सामान, चमड़े की वस्तुएं, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद और कृत्रिम आभूषण सहित कई तरह की वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इसके अलावा रोजवुड की वॉल हैंगिंग, बेड कवर, कुशन कवर और पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र हैं।
वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सहायता और ऋण योजनाओं पर जोर
मैसूरु के सरकारी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामदास अठावले ने अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सफाई कर्मचारियों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विकास निगम विभिन्न योजनाओं के तहत पात्र लोगों को रियायती वित्तीय सहायता और ऋण उपलब्ध कराते हैं।
योजना के प्रावधानों और पात्रता के अनुसार ऋण की राशि 1.5 लाख रुपये से लेकर 35 लाख रुपये तक हो सकती है। इन पहलों का उद्देश्य लोगों को स्वरोजगार, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान करना है।
मंत्री ने सामाजिक कल्याण के लिए बजटीय प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 57 लाख करोड़ रुपये के कुल केंद्रीय बजट में से 1.98 लाख करोड़ रुपये सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं।
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आरक्षण और सरकारी योजनाओं का किया उल्लेख
रामदास अठावले ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक आरक्षण, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 27 प्रतिशत आरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का भी जिक्र किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना से देशभर में लगभग चार करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिला है। इनमें कर्नाटक के करीब 10 लाख लाभार्थी शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिए जाने की बात भी कही। उनके अनुसार, कर्नाटक में इस योजना के तहत 2,22,23,000 बैंक खाते खोले गए हैं।
मैसूरु में हजारों विद्यार्थियों को मिली शैक्षिक सहायता
मंत्री ने जिले में विद्यार्थियों को दी जा रही शैक्षिक सहायता की जानकारी भी साझा की। उनके मुताबिक, कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 13,000 विद्यार्थियों और पोस्ट-मैट्रिक स्तर के 31,000 विद्यार्थियों को शैक्षिक सहायता का लाभ मिला है।
उन्होंने बताया कि मैसूरु जिले के 84 सरकारी छात्रावासों में लगभग 7,000 विद्यार्थी रहते हैं, जिनमें करीब 75 प्रतिशत अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। पात्रता के अनुसार, कॉलेज के विद्यार्थियों को 1,850 रुपये और हाई स्कूल के विद्यार्थियों को 1,750 रुपये मासिक वजीफा भी दिया जा रहा है।
कारीगरों को मुफ्त स्टॉल और अन्य सुविधाएं
शिल्प समागम मेले का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है। ग्राहकों से सीधे संपर्क होने पर कारीगर अपनी वस्तुओं का प्रचार कर सकते हैं, संभावित खरीदारों से जुड़ सकते हैं और अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के अवसर तलाश सकते हैं।
कारीगरों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए मंत्रालय उन्हें मुफ्त स्टॉल उपलब्ध कराता है। निर्धारित नियमों के अनुसार, यात्रा, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन और भोजन के लिए भी सहायता दी जाती है।
यह पहल पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान देती है।
भारत ट्यूलिप पहल से भी बढ़ेगा पारंपरिक उत्पादों का बाजार
शिल्प समागम मेले के साथ-साथ मंत्रालय भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) पहल को भी बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाना है।
इस पहल के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री को प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि कारीगर अधिक ग्राहकों से जुड़ सकें और अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।
2022 से आयोजित हो रहे हैं शिल्प समागम मेले
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेले आयोजित कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगरों को लाभ मिला है। मैसूरु में आयोजित मौजूदा मेला वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम आयोजन है।
मंत्रालय की योजना इस वित्तीय वर्ष में गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी ऐसे मेले आयोजित करने की है। इसके अलावा, मंत्रालय 14 से 27 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले और फरवरी 2027 में होने वाले सूरजकुंड मेले में भी भाग लेगा।
कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल
मैसूरु दशहरा प्रदर्शनी मैदान में 19 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला शिल्प समागम मेला लोगों को देश की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प उत्पादों को करीब से देखने का अवसर देता है। साथ ही, यह कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाशने और संभावित ग्राहकों से सीधे जुड़ने में मदद करता है।
मंत्रालय की इन पहलों का व्यापक उद्देश्य वंचित समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाना, पारंपरिक कौशल को संरक्षित करना तथा आर्थिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करना है।

