गेहूं की बुवाई से पहले गोबर की खाद का सही इस्तेमाल करना जरूरी है। जानें खाद की मात्रा, पराली वाले खेतों में यूरिया का उपयोग और बेहतर पैदावार के लिए जरूरी टिप्स।
गेहूं की खेती करने वाले किसान इन दिनों खेतों की तैयारी और खाद-उर्वरक के प्रबंधन में जुटे हैं। अच्छी पैदावार के लिए केवल महंगे रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मिट्टी की सेहत और पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन कच्ची गोबर की खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फसल की शुरुआती बढ़त को प्रभावित कर सकता है।
बहराइच के कृषि वैज्ञानिक डॉ. नंदन के अनुसार, गेहूं की बुवाई से पहले किसानों को खाद की मात्रा तय करते समय मिट्टी की जांच और खेत की वास्तविक जरूरत का ध्यान रखना चाहिए। सही प्रबंधन से फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकते हैं और खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
गेहूं की फसल के लिए कितनी खाद जरूरी है?
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में गेहूं की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश की सिफारिश बताई गई है। हालांकि, खाद की वास्तविक मात्रा मिट्टी की जांच, पिछली फसल और क्षेत्र में अपनाई जाने वाली कृषि पद्धति के आधार पर तय करनी चाहिए।
किसानों को उर्वरकों का इस्तेमाल संतुलित तरीके से करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा खाद डालने से लागत बढ़ सकती है और पोषक तत्वों का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
गोबर की खाद डालते समय न करें ये गलती
गेहूं की बेहतर पैदावार के लिए खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, सामान्य मार्गदर्शन के तौर पर प्रति हेक्टेयर 8 से 10 टन गोबर की खाद या 4 से 5 टन वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। इनकी मात्रा खेत की स्थिति और उपलब्ध पोषक तत्वों के अनुसार तय करना बेहतर है।
किसानों को कच्ची या अधपकी गोबर की खाद को जरूरत से ज्यादा मात्रा में खेत में डालने से बचना चाहिए। जब खेत में ताजा जैविक अवशेषों का अपघटन होता है, तो सूक्ष्मजीव मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन का कुछ हिस्सा इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण या इममोबिलाइजेशन कहा जाता है।
इससे फसल को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नाइट्रोजन नहीं मिल पाती और गेहूं की पत्तियों में पीलापन दिखाई दे सकता है। इसलिए बुवाई से पहले अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल करना और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना जरूरी है।
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धान की पराली वाले खेतों में कैसे करें खाद का प्रबंधन?
धान की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेषों के कारण भी गेहूं की शुरुआती बढ़त प्रभावित हो सकती है। पराली के अपघटन के दौरान मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन का कुछ हिस्सा सूक्ष्मजीवों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में फसल की पत्तियों में पीलापन दिखाई देने की आशंका रहती है।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार, पराली वाले खेतों में नाइट्रोजन प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मूल सामग्री में 20 से 25 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ डालने का सुझाव दिया गया है, लेकिन किसान इसे हर खेत के लिए अनिवार्य मात्रा न मानें। यूरिया की जरूरत मिट्टी की स्थिति, फसल की अवस्था और पहले दिए गए उर्वरकों के आधार पर तय होनी चाहिए।
यदि गेहूं की पत्तियां पीली पड़ रही हैं, तो केवल लक्षण देखकर अतिरिक्त यूरिया डालने के बजाय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। पत्तियों का पीलापन अन्य पोषक तत्वों की कमी, जलभराव या जड़ों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकता है।
प्रति एकड़ खाद की मात्रा कैसे निकालें?
किसानों को प्रति हेक्टेयर की मात्रा को प्रति एकड़ में बदलने के लिए लगभग 2.47 से भाग देना चाहिए। आसान गणना के लिए 2.5 से भाग देने का तरीका भी अपनाया जा सकता है।
यदि प्रति हेक्टेयर की सिफारिश 120:60:60 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की हो, तो 2.5 से भाग देने पर प्रति एकड़ लगभग ये मात्राएं निकलती हैं:
- नाइट्रोजन: 48 किलोग्राम
- फास्फोरस: 24 किलोग्राम
- पोटाश: 24 किलोग्राम
ध्यान दें: ये पोषक तत्वों की मात्रा हैं, यूरिया, डीएपी या पोटाश जैसे उर्वरकों के कुल वजन की मात्रा नहीं। अलग-अलग उर्वरकों में पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है, इसलिए खाद खरीदते और डालते समय उत्पाद के पोषक तत्वों के प्रतिशत के अनुसार गणना करें।
गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीके
गेहूं की फसल से बेहतर उत्पादन पाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं और रिपोर्ट के अनुसार उर्वरक चुनें।
- खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या उपयुक्त मात्रा में वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करें।
- धान की पराली वाले खेतों में नाइट्रोजन प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।
- गेहूं की किस्म, बुवाई के समय और मिट्टी की स्थिति के अनुसार खाद की मात्रा तय करें।
- फसल में पीलापन या कमजोर बढ़त दिखने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
गेहूं की खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए खाद का सही चुनाव और संतुलित इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण है। किसान यदि मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करें और कच्ची गोबर की खाद का अत्यधिक इस्तेमाल करने से बचें, तो फसल की शुरुआती बढ़त और मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

