तुअर, उड़द और मसूर के प्रमाणित बीज पर 100% सब्सिडी पाएं। जानें ₹12,000 प्रति क्विंटल तक की मदद और पात्रता।
दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बीज सब्सिडी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत तुअर, उड़द और मसूर की नई प्रमाणित किस्मों के बीज पर सब्सिडी बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक कर दी गई है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को अधिकतम 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की सहायता मिल सकती है।
इस फैसले का उद्देश्य किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना है। बीज की अधिक कीमत के कारण कई किसान नई किस्मों का इस्तेमाल करने से पीछे हट जाते हैं। सब्सिडी बढ़ने से उनकी शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दलहन बीज सब्सिडी में क्यों किया गया बदलाव?
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बीजों पर मिलने वाली सहायता में बदलाव किसानों की लागत कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने जुलाई 2026 में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्रमाणित दलहन बीजों पर सब्सिडी बढ़ाने का आग्रह किया था।
उन्होंने दलील दी थी कि बीजों की ऊंची कीमत के चलते किसान प्रमाणित किस्मों को पर्याप्त मात्रा में नहीं अपना पा रहे हैं। इसका असर बेहतर बीजों के इस्तेमाल और संभावित उत्पादन पर पड़ सकता है।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2026 को संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग दलहन फसलों और बीजों की उम्र के आधार पर सब्सिडी की दरें तय की गई हैं।
तुअर, उड़द और मसूर के बीज पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?
नई व्यवस्था में पिछले पांच वर्षों के भीतर जारी की गई प्रमाणित किस्मों के बीज पर सबसे ज्यादा सहायता निर्धारित की गई है।
- तुअर, उड़द और मसूर: बीज की लागत का 100 प्रतिशत या अधिकतम 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक।
- चना और अन्य दलहन: बीज की लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक।
- तुअर, उड़द और मसूर की 5 से 10 वर्ष पुरानी किस्में: लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक।
- चना और अन्य दलहन की 5 से 10 वर्ष पुरानी किस्में: लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि सब्सिडी वास्तविक पात्र लागत और निर्धारित अधिकतम सीमा के अनुसार मिलेगी। इसलिए प्रत्येक किसान को पूरी अधिकतम राशि मिलना जरूरी नहीं है।
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रबी सीजन में किसानों को मिल सकता है फायदा
रबी सीजन में चना और मसूर जैसी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों के लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य किसानों को समय पर बेहतर बीज उपलब्ध कराना और खेती की शुरुआती लागत कम करना है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि बीज खरीदने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या संबंधित सहकारी समिति से सब्सिडी की पात्रता, उपलब्ध किस्मों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करें।
योजना का लाभ लेने के लिए प्रमाणित बीज की खरीद और उससे संबंधित दस्तावेजों के नियमों का पालन करना जरूरी हो सकता है। आवेदन की प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता राज्य के कार्यान्वयन संबंधी निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कृषि मैपर तकनीक के लिए भी मिलेगी सहायता
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत खेतों की माप और संबंधित कार्यों के लिए कृषि मैपर तकनीक के इस्तेमाल पर प्रति हेक्टेयर 30 रुपये की अतिरिक्त सहायता का भी उल्लेख किया गया है।
तकनीक के इस्तेमाल से खेतों का सही क्षेत्रफल निर्धारित करने और योजना से जुड़ी गतिविधियों के प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता की पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया के लिए किसानों को संबंधित कृषि विभाग से पुष्टि करनी चाहिए।
प्रमाणित बीज इस्तेमाल करने से क्या होगा फायदा?
प्रमाणित बीजों की गुणवत्ता का परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। सही किस्म और बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग फसल की स्थापना, अंकुरण और संभावित उत्पादन में सुधार करने में मदद कर सकता है।
प्रमाणित बीजों की उपलब्धता से किसानों को नई किस्में अपनाने का अवसर मिलता है। कुछ किस्मों में विशेष कीटों और बीमारियों के प्रति बेहतर प्रतिरोध भी हो सकता है, लेकिन इसका लाभ फसल और किस्म की विशेषताओं पर निर्भर करता है।
बीज पर सब्सिडी मिलने से किसानों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले बीज खरीदना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इससे खेती की शुरुआती लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल सकती है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का क्या है उद्देश्य?
केंद्र सरकार का दलहन आत्मनिर्भरता मिशन देश में तुअर, उड़द, मसूर, चना और मूंग जैसी प्रमुख दलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसका व्यापक उद्देश्य घरेलू उत्पादन मजबूत करना और दलहन की मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता कम करना है।
इसके लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता, नई किस्मों को बढ़ावा देने और किसानों तक समय पर कृषि सामग्री पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। बीज निगमों और राज्य कृषि विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, ताकि बुवाई के समय किसानों को बीज की कमी का सामना न करना पड़े।
किसान सब्सिडी के लिए कहां संपर्क करें?
दलहन बीज सब्सिडी का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने जिले के कृषि विभाग, कृषि अधिकारी या सहकारी समिति से संपर्क कर सकते हैं। वहां से उन्हें पात्र बीजों, सब्सिडी की सीमा, उपलब्ध स्टॉक और आवेदन से संबंधित जानकारी मिल सकती है।
किसानों को बीज खरीदने से पहले यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित किस्म योजना के तहत पात्र है और खरीद के प्रमाण के रूप में आवश्यक रसीद या दस्तावेज उपलब्ध हैं।

