डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर हुआ। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और विक्रम नाथ ने मानवीय न्याय पर जोर दिया।
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) और कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (CLEA) के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी दिल्ली में दूसरे प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी शिक्षा, विधि जगत और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘संवेदना के साथ न्याय: कानून के पेशे में मानवीय समझ’ रहा। वक्ताओं ने न्यायिक व्यवस्था में संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर विचार साझा किए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया उद्घाटन
मेमोरियल लेक्चर का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने मुख्य व्याख्यान दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में कानून के साथ मानवीय समझ भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में करुणा और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि दया और सहानुभूति का प्रयोग कानून, निष्पक्षता तथा संवैधानिक मूल्यों की सीमाओं और सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
एन. आर. माधव मेनन के योगदान को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल डॉ. आर. वेंकटरमणी ने प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन के जीवन, विचारों और कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
प्रो. मेनन को भारत में आधुनिक कानूनी शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षाविद और संस्थान निर्माता के रूप में याद किया गया। उनके प्रयासों ने देश में कानूनी शिक्षा को नई दिशा देने और विधि के विद्यार्थियों को बेहतर अकादमिक आधार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कानून और न्याय पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम में भारतीय विधि संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर, CLEA के अध्यक्ष और भारत के 21वें विधि आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार ने भी संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। न्यायिक प्रक्रिया में समाज, व्यक्ति और मानवीय परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी जरूरी है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कानून के शासन, संवैधानिक मूल्यों और निष्पक्षता को बनाए रखते हुए न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और जन-केंद्रित कैसे बनाया जा सकता है।
दो महत्वपूर्ण कानूनी पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कानून के क्षेत्र से जुड़ी दो पुस्तकों का विमोचन भी किया।
इनमें शामिल हैं:
- ‘Indian Personal Law: Unity and Diversity’
- ‘Economics and Law in Context’
इन पुस्तकों के लेखक प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार हैं। दूसरी पुस्तक में सौगत तालुकदार सह-लेखक हैं। दोनों पुस्तकों की प्रस्तावना सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीशों द्वारा लिखी गई है।
विशेषज्ञों ने पुस्तकों की विषयवस्तु पर दी जानकारी
पुस्तकों का परिचय थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक एवं साउथशोर इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरीशंकर नटेसन, एसजीटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ की एसोसिएट प्रोफेसर नबीला ज़हरा और बर्दवान यूनिवर्सिटी के गवर्नमेंट सेंटर ऑफ लीगल एजुकेशन के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौगत तालुकदार ने दिया।
उन्होंने पुस्तकों के प्रमुख विषयों और कानून, अर्थव्यवस्था तथा व्यक्तिगत कानून से जुड़े समकालीन पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कानूनी शिक्षा और न्याय व्यवस्था पर संवाद का मंच
प्रो. एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर का उद्देश्य उनके बौद्धिक और शैक्षणिक योगदान को आगे बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से न्यायपालिका, कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वकीलों और कानून के विद्यार्थियों को न्याय, कानून और कानूनी शिक्षा के बदलते स्वरूप पर संवाद का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य की न्याय व्यवस्था में मानवीय संवेदना, सहानुभूति और सामाजिक परिस्थितियों की समझ को उचित स्थान मिलना चाहिए।
DAIC निदेशक ने किया अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि कानून, न्याय और समाज से जुड़े समकालीन विषयों पर सार्थक शैक्षणिक चर्चा के लिए ऐसे मंच महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी क्षेत्र, शिक्षा जगत और विधि के विद्यार्थियों सहित कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया।
अंत में CLEA की संयुक्त महासचिव डॉ. रुचि शर्मा डी. ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही दूसरे प्रो. (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन मेमोरियल लेक्चर का औपचारिक समापन हुआ।

