“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।”
महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की ये अमर पंक्तियाँ मातृभाषा के महत्व को गहराई से रेखांकित करती हैं। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, चेतना और आत्मगौरव की सशक्त अभिव्यक्ति है। ‘विश्व हिंदी दिवस’ के अवसर पर यही भावना देश-विदेश में बसे करोड़ों हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में जोड़ती है।
हिंदी भारत की सांस्कृतिक विविधता को समेटे हुए वह सेतु है, जो अलग-अलग बोलियों, परंपराओं और लोकसंस्कृतियों को जोड़कर ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करती है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक हिंदी संवाद की ऐसी भाषा बन चुकी है, जो विविधताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। यही कारण है कि आज हिंदी केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान को सुदृढ़ कर रही है।
विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना और इसे वैश्विक संवाद की एक प्रभावी भाषा के रूप में स्थापित करना है। संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, विश्वविद्यालयों और डिजिटल मंचों पर हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता इस बात का प्रमाण है कि यह भाषा समय के साथ और अधिक सशक्त हुई है। तकनीक, सोशल मीडिया, सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी ने नई पीढ़ी से भी गहरा संबंध स्थापित किया है।
आज हिंदी केवल साहित्यिक भाषा नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा और प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भाषा बनती जा रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा पर जोर, सरकारी कामकाज में हिंदी के बढ़ते उपयोग और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों ने हिंदी को आधुनिक संदर्भों में और प्रासंगिक बना दिया है। यह भाषा न केवल भावनाओं को व्यक्त करती है, बल्कि ज्ञान-विज्ञान, तकनीक और नवाचार की भी सशक्त वाहक बन रही है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे साहित्यकारों ने जिस हिंदी के उत्थान का स्वप्न देखा था, वह आज नए युग में नए आयाम छू रही है। उनकी विचारधारा हमें यह सिखाती है कि अपनी भाषा के विकास के बिना समग्र विकास संभव नहीं। मातृभाषा व्यक्ति को आत्मविश्वास देती है, समाज को जोड़ती है और राष्ट्र को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती है।
विश्व हिंदी दिवस पर देश और विदेश में विभिन्न कार्यक्रम, कवि सम्मेलन, संगोष्ठियाँ और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि वैश्वीकरण के दौर में अपनी भाषाई जड़ों से जुड़े रहना कितना आवश्यक है।
इस अवसर पर सभी देशवासियों और हिंदी प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। आइए, हम संकल्प लें कि हिंदी का सम्मान करेंगे, इसके प्रयोग को बढ़ाएंगे और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक समृद्ध बनाएंगे। हिंदी के सशक्तिकरण के साथ ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा भी और मजबूत होगी—यही विश्व हिंदी दिवस का सच्चा संदेश है।


