“वन्दे मातरम्” केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और राष्ट्रभक्ति का शाश्वत प्रतीक है। यह शब्द हर भारतीय के हृदय में देश के प्रति सम्मान, समर्पण और गर्व की भावना को जीवंत करता है।
वन्दे मातरम् का शाब्दिक अर्थ
“वन्दे” का अर्थ है मैं नमन करता हूँ
“मातरम्” का अर्थ है माता को
इस प्रकार “वन्दे मातरम्” का पूर्ण अर्थ है —
👉 “मैं मातृभूमि को नमन करता हूँ।”
यह मातृभूमि को माता के रूप में स्वीकार कर उसके प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करता है।
वन्दे मातरम् का ऐतिहासिक उद्गम
‘वन्दे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध लेखक और स्वतंत्रता सेनानी बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ (1882) में सम्मिलित है। उस दौर में यह गीत विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्षरत भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान “वन्दे मातरम्” क्रांतिकारियों और जन-आंदोलनों का नाद बन गया।
1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह जनगीत बना
लाला लाजपत राय, अरविंद घोष, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने इसे जन-जन तक पहुंचाया
यह उद्घोष अंग्रेज़ी शासन के लिए भय और भारतीयों के लिए साहस का स्रोत था
राष्ट्रीय महत्व
24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने “वन्दे मातरम्” को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। हालांकि “जन गण मन” भारत का राष्ट्रगान है, लेकिन “वन्दे मातरम्” का स्थान राष्ट्र की आत्मा के रूप में विशेष है।
आज के भारत में प्रासंगिकता
आज भी “वन्दे मातरम्”
राष्ट्रीय पर्वों
संसद और शैक्षणिक संस्थानों
जन आंदोलनों और सांस्कृतिक आयोजनों
में देशभक्ति की चेतना को जागृत करता है। यह गीत आने वाली पीढ़ियों को भारत की सांस्कृतिक जड़ों और संघर्षपूर्ण इतिहास से जोड़ता है।
“वन्दे मातरम्” भारतीय राष्ट्रवाद की अमर धरोहर है, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक सूत्र में पिरोती है।
वन्दे मातरम! 🇮🇳#VandeMataram150 pic.twitter.com/8769nou4jx
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) December 8, 2025


