“वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत पिछले 150 वर्षों से देशवासियों के हृदय में देशप्रेम की अलख जगाता आ रहा है। वंदे मातरम् की 150 वर्षों की यात्रा अत्यंत ही गौरवपूर्ण, प्रेरणादायक और ऐतिहासिक रही है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् देशवासियों की आवाज़ बन गया था। इस गीत ने लाखों लोगों को विदेशी शासन के विरुद्ध एकजुट होने की प्रेरणा दी और बलिदान, संघर्ष तथा आत्मसम्मान का प्रतीक बना। आंदोलनों, सभाओं और जेल यात्राओं में यह गीत राष्ट्रभक्तों के लिए संबल और ऊर्जा का स्रोत रहा।
आज भी वंदे मातरम् भारतीय संस्कृति, एकता और अखंडता का प्रतीक है। यह गीत नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करता है।
वंदे मातरम् की यह 150 वर्षों की यात्रा न केवल अतीत की स्मृति है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए भी प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनी हुई है।
150 वर्षों की वंदे मातरम् की यात्रा अत्यंत ही गौरवपूर्ण है pic.twitter.com/EYAr9Ipp60
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) December 19, 2025


