टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में भारत को साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और अजेय जिम्बाब्वे के साथ कठिन ग्रुप मिला है, जहां 17 साल पुराना संयोग फिर चुनौती बनकर सामने आया है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सुपर-8 राउंड टीम इंडिया के लिए आसान नहीं होने वाला है। 21 फरवरी से शुरू हो रहे इस दौर में भारत को ग्रुप-1 में साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे जैसी मजबूत और फॉर्म में चल रही टीमों के साथ रखा गया है। ग्रुप स्टेज में चारों टीमें अजेय रहते हुए आगे बढ़ी हैं, जिसके चलते इस पूल को पहले ही ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ कहा जा रहा है।
इस बीच एक 17 साल पुराना संयोग भी भारतीय फैंस की चिंता बढ़ा रहा है। टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार है, जब भारत, साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज एक ही सुपर-8 ग्रुप में आमने-सामने होंगे। इससे पहले 2009 में ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब भारत इन तीनों टीमों के साथ एक ही ग्रुप में था और तब टीम इंडिया अपने सभी मुकाबले हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। उस संस्करण में भारत को वेस्टइंडीज से 7 विकेट, साउथ अफ्रीका से 12 रन और इंग्लैंड से 3 रन से हार का सामना करना पड़ा था।
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इस बार हालात और भी चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि जिम्बाब्वे भी इस ग्रुप का हिस्सा है। सिकंदर रजा की कप्तानी में जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी दिग्गज टीमों को हराकर सबको चौंकाया है और वह भी अजेय रहते हुए सुपर-8 में पहुंची है। उनका आत्मविश्वास और फॉर्म इस ग्रुप को और खतरनाक बना देता है।
सुपर-8 से सिर्फ टॉप-2 टीमें ही सेमीफाइनल में पहुंचेंगी, ऐसे में भारत के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा होगा। टीम इंडिया का पहला मैच 22 फरवरी को अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका के खिलाफ होगा। इसके बाद 26 फरवरी को चेन्नई में जिम्बाब्वे से और 1 मार्च को कोलकाता में वेस्टइंडीज से भिड़ंत होगी।
सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम को न सिर्फ इस कठिन शेड्यूल से निपटना होगा, बल्कि 2009 की यादों से भी पार पाना होगा। फैंस को उम्मीद है कि इस बार टीम इंडिया पुराने इतिहास को पीछे छोड़ते हुए लगातार जीत दर्ज करेगी और सेमीफाइनल का टिकट कटाएगी। लेकिन मौजूदा ग्रुप की ताकत को देखते हुए इतना तय है कि सुपर-8 में भारत के लिए एक भी मैच आसान नहीं होने वाला।

