फरीदाबाद के ऐतिहासिक सूरजकुंड में देश की समृद्ध कला, संस्कृति और हस्तशिल्प परंपरा को समर्पित शिल्प महाकुंभ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस प्रतिष्ठित शिल्प महोत्सव का उद्घाटन 31 जनवरी को देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
यह शिल्प महोत्सव 16 दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी को होगा। समापन समारोह में राज्यपाल प्रोफेसर अशीम कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी सूरजकुंड शिल्प महाकुंभ देश-विदेश के पर्यटकों, कलाकारों और शिल्पकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।
शिल्प महाकुंभ का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक कलाओं को एक मंच पर प्रस्तुत करना है। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगर अपने-अपने क्षेत्र की विशिष्ट शिल्पकला जैसे मिट्टी के बर्तन, हथकरघा, लकड़ी की नक्काशी, धातु शिल्प, ज्वेलरी, पेंटिंग और हस्तनिर्मित वस्तुओं का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही कई विदेशी कलाकार और शिल्पकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले लेता है।
महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी विशेष व्यवस्था की गई है। लोक नृत्य, लोक संगीत, शास्त्रीय नृत्य और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियां प्रतिदिन दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियां प्रस्तुत करने के लिए विशेष थीम पवेलियन भी लगाए जाएंगे, जो आगंतुकों को भारत की विविधता से रूबरू कराएंगे।
पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में सूरजकुंड शिल्प महाकुंभ का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यह आयोजन न केवल कारीगरों और कलाकारों को रोजगार और पहचान प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है। होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय व्यवसायों को इससे विशेष लाभ होता है।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डिजिटल टिकटिंग, पार्किंग व्यवस्था और पर्यावरण के अनुकूल पहलें भी इस वर्ष आयोजन का हिस्सा होंगी।
कुल मिलाकर, सूरजकुंड शिल्प महाकुंभ 2026 कला, संस्कृति और परंपरा का एक जीवंत संगम साबित होने जा रहा है, जो भारत की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा।


