दिव्यांगजन के अधिकारों, सम्मान और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की सक्रिय भूमिका को भी आवश्यक बताया गया है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि दिव्यांगजन के हित में बनाई गई नीतियाँ और योजनाएँ तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब समाज संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के साथ आगे आए।
जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार लगातार दिव्यांगजन के कल्याण के लिए प्रगतिशील कदम उठा रही है—चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार अवसर या सार्वजनिक स्थलों पर पहुंच-सुविधा से जुड़ी पहल हों।
लेकिन इन प्रयासों को वास्तविक सफलता तभी मिलेगी जब परिवार, समाज और नागरिक स्वयं जिम्मेदारी दिखाते हुए दिव्यांगजनों के लिए सहयोगी वातावरण तैयार करें।
उन्होंने जोर दिया कि—
समाज में दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान और समानता का दृष्टिकोण विकसित करना होगा।
सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें सुविधाजनक माहौल देना चाहिए।
तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन के लिए सामुदायिक सहभागिता बढ़ानी होगी।
वक्ताओं का मानना है कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास ही दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान कर सकते हैं।
सरकार के साथ-साथ समाज को भी दिव्यांगजन के हित में जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए। इससे सरकार के प्रगतिशील प्रयासों को बल मिलेगा। pic.twitter.com/2uxr98Bp77
— President of India (@rashtrapatibhvn) December 3, 2025


