प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर नए युग की प्रशासनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
देश की प्रशासनिक संरचना को नए युग की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे “नए इतिहास की शुरुआत” करार देते हुए कहा कि यह बदलाव केवल इमारतों का नहीं, बल्कि सोच और कार्यसंस्कृति का भी है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन देश की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि अतीत में साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से बड़े फैसले लिए गए, लेकिन ये भवन औपनिवेशिक सोच के प्रतीक थे, जिनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन की ताकत को दिखाना था। अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसी आधुनिक इमारतें देश के नागरिकों की आकांक्षाओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि “जहां से देश चलता है, वह जगह प्रेरणादायी और प्रभावी होनी चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि 21वीं सदी के भारत को ऐसी कार्यस्थल व्यवस्था चाहिए, जो आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा दे। पुरानी इमारतों में जगह की कमी और सुविधाओं की सीमाएं थीं, जबकि नई इमारतें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं, जिससे सरकारी कामकाज अधिक सुचारू और किफायती होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में “गुलामी की मानसिकता को बदलने के अभियान” का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने बीते वर्षों में कई प्रतीकों और स्थानों को नई पहचान दी है, ताकि शासन का मिजाज सेवा और जनकल्याण की भावना से जुड़ सके। उन्होंने इसे केवल नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सोच में बदलाव का प्रतीक बताया।
सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय जैसे प्रमुख कार्यालय स्थापित किए गए हैं। वहीं, कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, कानून, संस्कृति, सूचना एवं प्रसारण, कॉर्पोरेट कार्य, रसायन और उर्वरक, जनजातीय कार्य सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय होंगे। इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन नई इमारतों से लिए जाने वाले फैसले किसी शासक की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया प्रशासनिक ढांचा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन न सिर्फ एक बुनियादी ढांचे का विस्तार है, बल्कि यह भारत की बदलती सोच, आत्मविश्वास और भविष्य की दिशा का भी प्रतीक माना जा रहा है।


