जमशेदपुर (झारखंड)। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा के समापन समारोह और ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा विकसित ओल चिकी लिपि आज संथाल समुदाय की पहचान का एक सशक्त प्रतीक बन चुकी है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समुदाय के विकास और भाषा के समृद्धिकरण के लिए यह आवश्यक है कि संथाली भाषा के विद्यार्थियों को अन्य भाषाओं से भी परिचित कराया जाए। इससे न केवल उनका बौद्धिक विकास होगा, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद और समझ भी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के प्रयास संथाली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए भी किए जाने चाहिए, ताकि संथाली संस्कृति, परंपराओं और साहित्यिक विरासत को व्यापक पहचान मिल सके।
राष्ट्रपति मुर्मू ने ओल चिकी लिपि के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक लिपि नहीं, बल्कि संथाल समाज की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और विरासत का प्रतीक है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर संथाल समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भाषा और संस्कृति का संरक्षण ही किसी समाज की असली शक्ति होती है।
President Droupadi Murmu addressed the closing ceremony of the 22nd Parsi Maha and the centenary celebrations of Ol Chiki at Jamshedpur, Jharkhand. She said that the Ol Chiki script developed by Pandit Raghunath Murmu has become a powerful symbol of the Santhal identity.
She… pic.twitter.com/sKFy30zrzz
— President of India (@rashtrapatibhvn) December 29, 2025


