राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके विचारों, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे, बल्कि वे संपूर्ण विश्व के लिए सत्य, अहिंसा और नैतिक मूल्यों के प्रतीक भी रहे हैं।
महात्मा गांधी जी का जीवन सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने अपने विचारों और आचरण के माध्यम से यह सिद्ध किया कि बिना हिंसा के भी बड़े से बड़ा परिवर्तन संभव है। उनका मानना था कि सत्य केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग है। इसी सत्य के बल पर उन्होंने भारत को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर किया और करोड़ों भारतीयों में आत्मविश्वास एवं आत्मबल का संचार किया।
गांधी जी के विचार राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाले रहे हैं। उन्होंने जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एक सशक्त और संगठित भारत की परिकल्पना की। उनका सपना था ऐसा भारत, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों। इसी सोच के साथ उन्होंने छुआछूत, सामाजिक असमानता और अन्य कुरीतियों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया।
महात्मा गांधी की शिक्षाओं में ‘रामराज्य’ की अवधारणा का विशेष स्थान है। उनके लिए रामराज्य का अर्थ किसी धार्मिक शासन से नहीं, बल्कि ऐसे आदर्श समाज से था, जहां न्याय, समानता, सत्य और नैतिकता सर्वोपरि हों। वे मानते थे कि सच्चा रामराज्य वही है, जहां सबसे कमजोर व्यक्ति भी स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। आज के समय में यह विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जब समाज को नैतिक मूल्यों और आपसी विश्वास की सबसे अधिक आवश्यकता है।
गांधी जी का संदेश केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने संपूर्ण विश्व में शांति, सद्भाव और मानवता के कल्याण की भावना को मजबूत किया। उनके अहिंसा के सिद्धांत ने दुनिया भर के कई नेताओं और आंदोलनों को प्रेरित किया, जिनमें मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे महान व्यक्तित्व शामिल हैं। यह उनकी सोच की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
पुण्यतिथि के अवसर पर देशवासियों ने संकल्प लिया कि वे महात्मा गांधी के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाएं। सत्यनिष्ठा, अहिंसा, सहिष्णुता और सेवा भाव जैसे मूल्य आज भी राष्ट्र और समाज को सशक्त बनाने की कुंजी हैं। महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि हमें यह याद दिलाती है कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही एक शांत, समृद्ध और नैतिक समाज का निर्माण संभव है।


