भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पिछले कई दशकों में भारत की अंतरिक्ष यात्रा को अभूतपूर्व ऊँचाइयों तक पहुंचाया है। अपनी विश्वसनीयता, क्षमता और किफायती तकनीक के दम पर इसरो ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की एक अलग पहचान भी स्थापित की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसरो की उपलब्धियाँ—चंद्रमा और मंगल मिशन से लेकर सैटेलाइट लॉन्चिंग में नए रिकॉर्ड तक—भारत की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार की मिसाल हैं। इसकी लो-कॉस्ट स्पेस टेक्नोलॉजी मॉडल ने विश्व भर का ध्यान आकर्षित किया है, जिससे कई देशों ने अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो पर भरोसा जताया है।
हाल के वर्षों में इसरो ने वाणिज्यिक लॉन्चिंग, नेविगेशन सेवाओं, पृथ्वी अवलोकन और मानव अंतरिक्ष मिशनों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गगनयान मिशन सहित कई आगामी परियोजनाएँ भारत की वैश्विक स्पेस प्रतिस्पर्धा में भूमिका को और मजबूत करेंगी।
विश्लेषकों का मत है कि इसरो की प्रगति ने नए नवाचारों, स्टार्टअप्स और निजी स्पेस कंपनियों के लिए भी अवसरों के द्वार खोले हैं, जिससे “न्यू स्पेस इंडिया” की अवधारणा को गति मिल रही है।
भारत की अंतरिक्ष यात्रा आज इसरो के अथक परिश्रम, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शिता का परिणाम है, जिसने देश को वैश्विक स्पेस मैप पर मजबूती से स्थापित किया है।
ISRO has powered India's space journey to new heights for decades. Through its credibility, capacity and value, India has carved out a distinct identity in the global space landscape. pic.twitter.com/50wE3B9cPh
— PMO India (@PMOIndia) November 27, 2025


