हरियाणा में RTE के तहत 25% आरक्षित सीटें भरना अनिवार्य, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने निजी स्कूलों को पोर्टल अपडेट करने का आखिरी मौका दिया।
हरियाणा में शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के लिए कक्षा पहली और उससे पूर्व की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।
चंडीगढ़ में जारी बयान में शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि वे 11 मार्च से 20 मार्च 2026 के बीच अपनी आरक्षित सीटों का विवरण विभागीय वेबसाइट और उज्ज्वल पोर्टल पर अपलोड करें। हालांकि, प्रदेश के 9230 निजी विद्यालयों में से 8621 विद्यालयों ने समय पर जानकारी अपलोड कर दी, लेकिन 609 विद्यालय ऐसे रहे जिन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके अलावा, 891 विद्यालयों ने आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं किए, जिसके चलते उनकी प्रविष्टियां अस्वीकार कर दी गईं।
इस लापरवाही के कारण शिक्षा विभाग ने करीब 1500 विद्यालयों के एमआईएस पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था, जिससे उनकी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। इस मुद्दे को लेकर निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने सरकार से संपर्क किया और छात्रों के दाखिले पर पड़ रहे असर की जानकारी दी।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित को प्राथमिकता देते हुए एक संवेदनशील निर्णय लिया है। मंत्री महीपाल ढांडा ने घोषणा की कि जिन स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद किया गया था, उन्हें एक और मौका देते हुए पुनः चालू किया जा रहा है। अब इन विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्रता से अपनी मान्यता से जुड़े दस्तावेज अपलोड करें और आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों का पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करें।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से अपील की कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें और किसी भी पात्र बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित न होने दें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई विद्यालय नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे हजारों बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
