वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि बूचड़खाने उद्योग के रूप में लाइसेंस प्राप्त कर संचालित होते हैं और तय मानकों की जांच के बाद ही संचालन की अनुमति दी जाती है।
हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि राज्य में बूचड़खाने अब एक लाइसेंस प्राप्त उद्योग के रूप में संचालित किए जा रहे हैं और इनके संचालन की अनुमति केवल निर्धारित नियमों व मानकों को पूरा करने के बाद ही दी जाती है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाती।
मंत्री हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में विधायक चौधरी मामन खान द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि बूचड़खानों की निगरानी के लिए एक संयुक्त निरीक्षण टीम बनाई गई है, जिसमें पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। यह टीम समय-समय पर निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट संबंधित विभागों को सौंपती है।
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राव नरबीर सिंह ने जानकारी दी कि नूंह जिले में स्थित बूचड़खाने के आसपास 18 फरवरी 2026 को पानी के नमूनों की जांच के लिए संयुक्त निरीक्षण किया गया था। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि आसपास की खड़ी फसलों में कहीं भी पशु रक्त मिश्रित जलभराव नहीं पाया गया है, जिससे किसानों और स्थानीय लोगों को राहत मिली है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बूचड़खाना इकाइयों पर ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ की शर्त लागू नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है और यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित इकाई के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि विकास के साथ-साथ जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

