धर्मनगरी हरिद्वार में आज संत परंपरा और सनातन संस्कृति से जुड़ा एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण देखने को मिला। भारत माता मंदिर के संस्थापक, ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की समाधि मंदिर का लोकार्पण एवं श्री विग्रह मूर्ति की स्थापना समारोह जूना पीठाधीश्वर, पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर श्री अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश की राजनीति और आध्यात्मिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां एक मंच पर नजर आईं।
समारोह में माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती जी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा और धर्माचार्य भी मौजूद रहे। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और गरिमा का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के जीवन और उनके योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पूज्य स्वामी जी भारत की सनातन परंपरा के सच्चे ध्वजवाहक थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज को जोड़ने, समन्वय और सौहार्द का संदेश देने का कार्य किया। करुणा और मैत्री उनके विचारों की आत्मा थी, जिसे उन्होंने जन-जन तक पहुंचाया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संतों की परंपरा भारत की आत्मा को मजबूत करती है और ऐसे महापुरुषों का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान सिर्फ धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज में एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि हमेशा से संतों और तपस्वियों की कर्मभूमि रही है और ऐसे आयोजनों से इस परंपरा को और मजबूती मिलती है। उन्होंने इस आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया।
समाधि मंदिर और विग्रह स्थापना के साथ ही श्रद्धालुओं ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की स्मृतियों को नमन किया और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। संतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। पूरे परिसर में भक्ति भाव, मंत्रोच्चार और शांति का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने पूज्य स्वामी जी महाराज की पावन स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन किया और उनके द्वारा दिए गए समन्वय, करुणा और मैत्री के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा की जीवंत झलक भी बनकर सामने आया।


