संसद का बजट सत्र 2026 आगामी 1 फरवरी से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा। इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। बजट सत्र की रूपरेखा को अंतिम रूप देते हुए लोकसभा की व्यापार सलाहकार समिति (बीएसी) ने राष्ट्रपति के अभिभाषण और केंद्रीय बजट पर चर्चा के लिए विस्तृत समय निर्धारित किया है।
बीएसी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में कुल 18 घंटे की चर्चा होगी। यह चर्चा 2, 3 और 4 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही सरकार की नीतियों, पिछले कार्यकाल के कामकाज और भविष्य की योजनाओं पर अपने-अपने विचार रखेंगे।
सरकार की ओर से इस बहस का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री 4 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस संबोधन में सरकार की प्राथमिकताएं, उपलब्धियां और आगामी वर्ष की रणनीति को लेकर स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं।
इसके अलावा, बजट सत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केंद्रीय बजट 2026-27 पर होने वाली आम चर्चा होगी। बीएसी के फैसले के मुताबिक बजट पर लोकसभा में 5, 9, 10 और 11 फरवरी को चर्चा की जाएगी। इस चर्चा के लिए भी कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें विभिन्न दलों के सांसद बजट के प्रावधानों, आर्थिक नीतियों और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव पर अपनी राय रखेंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पर चर्चा का समापन करते हुए 11 फरवरी को सरकार की ओर से जवाब देंगी। उनके भाषण में बजट के प्रमुख बिंदुओं पर उठाए गए सवालों और सुझावों का उत्तर दिए जाने की उम्मीद है। साथ ही, वित्त मंत्री आर्थिक सुधारों, विकास दर, रोजगार, महंगाई और राजकोषीय संतुलन जैसे मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखेंगी।
बजट सत्र के दौरान कई अहम विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं। इसके अलावा, प्रश्नकाल, शून्यकाल और स्थगन प्रस्तावों के जरिए विपक्ष सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जवाब मांग सकता है। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सत्र को सुचारू रूप से चलाने और अधिक से अधिक विधायी कामकाज निपटाने पर जोर दिया जाएगा। वहीं विपक्ष की ओर से भी यह संकेत मिल रहे हैं कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।
कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 न केवल आर्थिक दिशा तय करने वाला होगा, बल्कि राजनीतिक बहस और नीतिगत चर्चाओं का भी अहम मंच बनेगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण से लेकर केंद्रीय बजट पर होने वाली लंबी चर्चा तक, यह सत्र देश की आगामी नीतियों और विकास के रोडमैप को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


